ब्रह्मकुमारी गीता : चरित्र का चित्रण करते हैं महाभारत के पात्रों के नाम

गुण्डरदेही। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि ज्ञान समान पवित्र करने वाला इस संसार में दूसरा कुछ भी नहीं। यदि वेद शास्त्रों से प्यार है तो कर्म सुधारें, तकदीर आपकी दासी हो जाएगी। सारे वेद शास्त्रों का सार है कि सुख देने से सुख मिलता है और दुख देने से दुख। गीता दीदी प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित रामायण महाभारत एवं श्रीमद् भगवत गीता पर आधारित सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ शिविर के द्वितीय दिवस पर शिविरार्थियों को संबोधित कर रही थीं। गुण्डरदेही। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि ज्ञान समान पवित्र करने वाला इस संसार में दूसरा कुछ भी नहीं। यदि वेद शास्त्रों से प्यार है तो कर्म सुधारें, तकदीर आपकी दासी हो जाएगी। सारे वेद शास्त्रों का सार है कि सुख देने से सुख मिलता है और दुख देने से दुख। गीता दीदी प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित रामायण महाभारत एवं श्रीमद् भगवत गीता पर आधारित सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ शिविर के द्वितीय दिवस पर शिविरार्थियों को संबोधित कर रही थीं। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में जितने भी पात्र है उनके नाम प्रतिकात्मक है। आधुनिक महाभारत काल में पाण्डव वे है जो परमात्मा से प्रीत रखते है। युधिष्ठिर का अर्थ युध्द जैसी परिस्थिति में बुध्दि स्थिर रखने वाला। भीम वह जो भय मुक्त हो, साहस का प्रतीक ज्ञान रुपी गदा जिसके हाथ में हो। सुन करके ज्ञान अर्जन (धारण) करने वाला ही अर्जुन। जो गुणवान लोगों की नकल करके पाण्डवों की लिस्ट में गया वह नकुल। श्रेष्ठ कार्य में सहयोग देने वाला सहदेव। इन पांचों क्वालिटी का वरण करने वाली द्रौपदी। ऐसी द्रोपदी की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि इसी प्रकार कौवे व गिद्ध की तरह दूसरे की संपत्ति छीनने की कोशिश करने वाले कौरव। भ्रष्ट कर्म में धन लगाने वाला दुर्योधन, अनुशासन हीन, सत्ता का दुरुपयोग करने वाले दु:शासन। महाभारत के सभी पात्रों के नाम उनके गुण और चरित्र से मेल खाते हैं, उनकी व्याख्या करते हैं। उन्होंने गीता का महत्व बताते हुए कहा कि यदि सारे वेद शास्त्रों को किसी गाय में डाल दिया जाए तो गीता ज्ञान उसका दूध अर्थात सार है। हमें स्वयं में पाण्डवों की क्वालिटी को धारण करना है। अंत में उन्होंने कुछ समय मेडिटेशन भी कराया।

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