मराठा लक्ष्मीकांत शिर्के : जहां औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है इस फौजी की दास्तां

भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा। साल भर बाद काम पर लौटे तो लाइब्रेरी में नियुक्ति मिली। ढेरों पुस्तकें पढ़ डाली और निकल पड़े इतिहास रचने।यह कहानी है भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी लक्ष्मीकांत शिर्के की। ट्रेन हादसे में उन्हें दाहिना हाथ व बायां पैर गंवाना पड़ा। laxmikant_shirke भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।एक साल तक बिस्तर पर पड़े रहने के बाद लक्ष्मीकांत काम पर लौटे। बीएसपी ने उन्हें लाइब्रेरी में काम दे दिया। फुरसत के पलों में वे किताबें पढ़ते। इसी दौरान उनके हाथ ऐसी किताब लगी जिसमें वल्र्ड रिकॉर्ड बनाने वालों की कहानियां सचित्र प्रकाशित थीं। जिंदगी में कुछ कर गुजरने वालों की दास्तां पढ़कर उन्हें जैसे लक्ष्य मिल गया। उन्होंने ठान लिया कि अब रुकना नहीं है। दुनिया को लक्ष्मीकांत का नया रूप दिखाना है। लक्ष्मीकांत कार ड्राइविंग के शौकीन थे। उन्होंने सोचा कि क्यों न शौक को ही सफलता की सीढ़ी बनाया जाए। मन की बात जब उन्होंने परिजनों व मित्रों को बताई तो सभी ने सवाल पर सवाल खड़े कर दिए। एक हाथ और एक पैर से भला कैसे ड्राइविंग कर पाओगे? हमेशा हादसे का डर बना रहेगा? आदि..।
लक्ष्मीकांत बताते हैं कि लोगों की बातों से वे घबराने की बजाय और मजबूत होते गए, क्योंकि वे मानते हैं कि चुनौतियां स्वीकार करना ही असल जिंदगी है। बस फिर क्या था। एक हाथ में थामी कार की स्टेयरिंग व एक पैर से क्लच-गियर-ब्रेक। पहले ही साल 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर ली। आज वे 75 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ ही 2017 में इंडियाज स्टार बुक ऑफ रिकॉर्ड भी उनके नाम है। छत्तीसगढ़ में जहां भी कार रैली होती है, लक्ष्मीकांत जरूर नजर आ जाते हैं। उनका लक्ष्य डेढ़ लाख किमी का आंकड़ा है।
सैनिक का जिगर, मराठा रेजीमेंट में दिखा चुके हैं दम
लक्ष्मीकांत के बड़े भाई बीएसपी में नौकरी करते थे। उन्होंने ही लक्ष्मीकांत को महाराष्ट्र से भिलाई बुलाया और पढ़ाया। रविशंकर यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र से एमए करने के बाद इलेक्ट्रिकल से आईटीआई किया। इसके बाद 36-मराठा मीडियम रेजीमेंट में सेलेक्शन हो गया। 1980 से 1995 तक 15 साल सेना की नौकरी की। रिटायरमेंट के बाद 1996 में बीएसपी ने मचरंट मिल में नौकरी दी।

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