भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी एवं विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्नेह संपदा, भिलाई More »

भिलाई। सिविक सेन्टर की चौपाटी में लगी विशाल भारतीय सिल्क एक्सपो प्रदशर्नी का शनिवार शाम यंगिस्तान के चेयरमैन मनीष पाण्डेय ने विधिवत उद्घाटन किया। उनके More »

न्यूकैसल। कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप, न्युकैसल, इंग्लैंड में भारत ने 03 स्वर्ण, 02 रजत एवं 08 कांस्य पदक सहित कुल 13 पदक हासिल किया। पदक तालिका More »

भिलाई। साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनकी कृतियों की चर्चा करना और इसमें युवा पीढ़ी को शामिल करना प्रशंसनीय है। उनकी रचनाधर्मिता से More »

भिलाई। स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत श्रीशंकराचार्य महाविद्यालय ने ग्राम खपरी में एक वैचारिक आंदोलन खड़ा कर दिया है। महाविद्यालय के रोटरैक्ट क्लब, More »

 

Daily Archives: February 5, 2018

3400 युवकों का ‘पकड़ुआ विवाह’, जो बोया सो काट रहे हैं बिहार के दहेज लोभी

पटना। कुछ लोग, जिनमें बड़ी तादाद में शिक्षित लोग भी शामिल हैं का मानना है कि बिना दान दहेज के शादी हो ही नहीं सकती। दान का तो समझ में आता है। हमेशा के लिए किसी और घर, कुल, गोत्र में शामिल होने जा रही बेटी को कोई खाली हाथ नहीं भेजता पर तिलक पर दहेज की मांग अशोभनीय, पीड़ादायक और अपराध है। बिहार के लोगों ने अब खुद ही इसका हल ढूंढ लिया है। योग्य वर को अब पकड़ुआ विवाह का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले साल राज्य में करीब 3400 युवकों का 'पकड़ुआ विवाह' कराया गया।पटना। कुछ लोग, जिनमें बड़ी तादाद में शिक्षित लोग भी शामिल हैं का मानना है कि बिना दान दहेज के शादी हो ही नहीं सकती। दान का तो समझ में आता है। हमेशा के लिए किसी और घर, कुल, गोत्र में शामिल होने जा रही बेटी को कोई खाली हाथ नहीं भेजता पर तिलक पर दहेज की मांग अशोभनीय, पीड़ादायक और अपराध है। बिहार के लोगों ने अब खुद ही इसका हल ढूंढ लिया है। योग्य वर को अब पकड़ुआ विवाह का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले साल राज्य में करीब 3400 युवकों का ‘पकड़ुआ विवाह’ कराया गया।

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फुटपाथ से उठती है बारह खड़ी और पहाड़ों की आवाज

इंदौर। किला मैदान रोड के पास फुटपाथ पर लोहा पीटने की आवाज के बीच से 'अ' अनार का, 'आ' आम का और 'दो एकम दो... दो दूनी चार...' की आवाज सुनाई पड़ती है। फुटपाथ पर टंगे बोर्ड और बारहखड़ी के पोस्टर खुद ब खुद निगाह उस तरफ खींच लेते हैं। पंद्रह-बीस के समूह के बीच बैठे मास्टरजी बच्चों को पढऩे-लिखने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत देते हैं। जहां इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास अपने बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं है, वहीं किला मैदान वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर भटकने वाले बच्चों के लिए रोज क्लास लगती है।इंदौर। किला मैदान रोड के पास फुटपाथ पर लोहा पीटने की आवाज के बीच से ‘अ’ अनार का, ‘आ’ आम का और ‘दो एकम दो… दो दूनी चार…’ की आवाज सुनाई पड़ती है। फुटपाथ पर टंगे बोर्ड और बारहखड़ी के पोस्टर खुद ब खुद निगाह उस तरफ खींच लेते हैं। पंद्रह-बीस के समूह के बीच बैठे मास्टरजी बच्चों को पढऩे-लिखने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत देते हैं। जहां इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास अपने बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं है, वहीं किला मैदान वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर भटकने वाले बच्चों के लिए रोज क्लास लगती है।

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