भिलाई। एमजे कालेज जुनवानी में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आज प्रात: सामूहिक रूप से आसन और प्राणायाम किये गये। महाविद्यालय की डायरेक्टर More »

भिलाई। संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स कैम्पस में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विभिन्न आयोजन किये गये। छात्राओं तथा महिला फैकल्टीज ने इस अवसर पर दीवार More »

भिलाई। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के महिला प्रकोष्ठ दीया वुमन विंग छत्तीसगढ़ द्वारा नारी सशक्तिकरण दिवस के रूप में More »

भिलाई। केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने आज सोनी लिव पर प्रस्तुत सुपर डांसर चैप्टर-2 की फाइनलिस्ट शगुन सिंह परी के लिए वोट मांगा। श्री More »

रायपुर। करियर और परिवार के बीच बेहतर सामंजस्य बैठाने के लिए बेटियों को भी अपना नजरिया बदलना होगा। टाइम मैनेजमेंट, पाजीटिव सोच और तनाव कम More »

 

Daily Archives: February 5, 2018

3400 युवकों का ‘पकड़ुआ विवाह’, जो बोया सो काट रहे हैं बिहार के दहेज लोभी

पटना। कुछ लोग, जिनमें बड़ी तादाद में शिक्षित लोग भी शामिल हैं का मानना है कि बिना दान दहेज के शादी हो ही नहीं सकती। दान का तो समझ में आता है। हमेशा के लिए किसी और घर, कुल, गोत्र में शामिल होने जा रही बेटी को कोई खाली हाथ नहीं भेजता पर तिलक पर दहेज की मांग अशोभनीय, पीड़ादायक और अपराध है। बिहार के लोगों ने अब खुद ही इसका हल ढूंढ लिया है। योग्य वर को अब पकड़ुआ विवाह का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले साल राज्य में करीब 3400 युवकों का 'पकड़ुआ विवाह' कराया गया।पटना। कुछ लोग, जिनमें बड़ी तादाद में शिक्षित लोग भी शामिल हैं का मानना है कि बिना दान दहेज के शादी हो ही नहीं सकती। दान का तो समझ में आता है। हमेशा के लिए किसी और घर, कुल, गोत्र में शामिल होने जा रही बेटी को कोई खाली हाथ नहीं भेजता पर तिलक पर दहेज की मांग अशोभनीय, पीड़ादायक और अपराध है। बिहार के लोगों ने अब खुद ही इसका हल ढूंढ लिया है। योग्य वर को अब पकड़ुआ विवाह का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले साल राज्य में करीब 3400 युवकों का ‘पकड़ुआ विवाह’ कराया गया।

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फुटपाथ से उठती है बारह खड़ी और पहाड़ों की आवाज

इंदौर। किला मैदान रोड के पास फुटपाथ पर लोहा पीटने की आवाज के बीच से 'अ' अनार का, 'आ' आम का और 'दो एकम दो... दो दूनी चार...' की आवाज सुनाई पड़ती है। फुटपाथ पर टंगे बोर्ड और बारहखड़ी के पोस्टर खुद ब खुद निगाह उस तरफ खींच लेते हैं। पंद्रह-बीस के समूह के बीच बैठे मास्टरजी बच्चों को पढऩे-लिखने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत देते हैं। जहां इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास अपने बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं है, वहीं किला मैदान वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर भटकने वाले बच्चों के लिए रोज क्लास लगती है।इंदौर। किला मैदान रोड के पास फुटपाथ पर लोहा पीटने की आवाज के बीच से ‘अ’ अनार का, ‘आ’ आम का और ‘दो एकम दो… दो दूनी चार…’ की आवाज सुनाई पड़ती है। फुटपाथ पर टंगे बोर्ड और बारहखड़ी के पोस्टर खुद ब खुद निगाह उस तरफ खींच लेते हैं। पंद्रह-बीस के समूह के बीच बैठे मास्टरजी बच्चों को पढऩे-लिखने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत देते हैं। जहां इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास अपने बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं है, वहीं किला मैदान वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर भटकने वाले बच्चों के लिए रोज क्लास लगती है।

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