रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।

देशभर में प्रसिद्ध है 500 साल पुराना रायपुर का बंजारी मंदिर

रायपुर। रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर देशभर में प्रसिद्घ है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। बैठकी, अष्टमी और पंचमी के दिन विशेष पूजन अर्चना होती है और इन दिवसों पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। बंजारी मंदिर के ठीक सामने परिसर में अमर जवान ज्योत निरंतर जलती रहती है। यहां शान से लहराता तिरंगा देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। देवी भक्ति और देश प्रेम का यहां अनूठा संगम है।बंजारी मंदिरऐसे प्रमाण मिले हैं कि करीब 500 साल पहले मुगलकालीन शासकों के दौर में इस मंदिर की स्थापना हुई थी। तब इसका आकार छोटा था, लेकिन 40 साल पहले इसका जिर्णोद्धार हुआ और आज यह विशाल मंदिर के रूप में प्रतिस्थापित है।
बंजारी माता की मूर्ति बगुलामुखी रूप में होने के चलते यहां तांत्रिक पूजा की विशेष मान्यता है। मंदिर में व्यक्ति के कर्म-मोक्ष के बीच के चक्र, स्वर्ग-नरक की परिकल्पनाओं को विविध मूर्तियों व चित्रकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। चैत्र व क्वांर नवरात्रि पर हजारों की संख्या में लोग यहां आस्था की जोत प्रज्जवलित करते हैं। मंदिर की ओर से 10 महाजोत प्रज्जवलित की जाती है। मंदिर के पीछे गौशाला और गुरुकुल का संचालन किया जाता है, जिसमें गायों की सेवा के साथ बच्चों को अध्यात्म की शिक्षा भी दी जाती है। अब इस मंदिर का संचालन बंजारी माता ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है।
मान्यता यह भी है
माना जाता है कि बंजर धरती से प्रकट होने के कारण प्रतिमा बंजारी देवी के नाम से मशहूर हुई। दूसरी तरफ बंजारा समुदाय की देवी के रूप में भी बंजारी माता का पूजन किया जाता है। कालांतर में ही इस मंदिर का नाम बंजारी मंदिर पड़ गया।

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