स्कूल-कॉलेज कैम्पस में ही विकसित होती है नेतृत्व की क्षमता : कुलसचिव

Dr Rajesh Pandey Registrar Hemchand Yadav Universityभिलाई। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव डॉ राजेश पाण्डेय ने कहा, ‘लीडरशिप का मतलब चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी अपनी जगह अपने कर्मों से नेतृत्व प्रदान कर सकता है। उन्होंने छात्र समुदाय का आह्वान किया कि वे अपने भीतर नेतृत्व क्षमता का विकास करें।’ डॉ पाण्डेय स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में छात्रसंघ शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नेपोलियन भी एक लीडर थे और विनोबा भावे, महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, बाबा आम्टे, अन्ना हजारे, आदि भी लीडर रहे हैं। नेपोलियन को जहां तानाशाह माना जाता है वहीं महात्मा गांधी से अन्ना तक लोगों ने समाज को नेतृत्व प्रदान किया।  डॉ राजेश पाण्डेय ने कहा, छात्र संघ के पदाधिकारी भी अपने कर्मों से छात्र समुदाय का नेतृत्व कर सकते हैं। यदि छात्रसंघ अध्यक्ष एक पौधा लगाकर और सींचकर उसके बड़ा होने तक उसकी देखभाल करता है और दूसरे भी उससे प्रेरित होकर ऐसा करने लगते हैं तो यह भी नेतृत्व है। प्रेरक गतिविधियों से हम एक चेन रिएक्शन शुरू करते हैं और यह तेजी से आगे बढ़ता हुआ स्थायी हो जाता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक संसार में नेतृत्व के विभिन्न आयाम हो गए हैं। अमेरिका जहां सॉफ्टवेयर में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है वहीं जापान और कोरिया आॅटोमोबाइल के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं। नोबेल विजेता प्रो. अमर्त्यसेन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज ज्ञान और सोच के जरिए भी दुनिया का नेतृत्व किया जा सकता है।
महाविद्यालयों में निरंतर घटती उपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव ने कहा कि किताबी ज्ञान आप घर पर, कोचिंग सेन्टर पर भी हासिल कर सकते हैं पर महाविद्यालयों की भूमिका यहीं तक सीमित नहीं है। महाविद्यालय आपको अपनी क्षमताओं को निखारने का, अपने व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। महाविद्यालय के प्राध्यापक संस्कारों की चलती-फिरती पाठशाला हैं। उनके सान्निध्य में आप अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। आप अपने जीवन में जो कुछ भी बनते हैं वह अपने परिवार और अपनी शिक्षण संस्थाओं की बदौलत बनते हैं।
उन्होंने कहा कि फ्रांस के प्रथम सम्राट नेपोलियन को अजेय योद्धा बनाने के पीछे भी उनकी स्कूली शिक्षा का हाथ था। एटन पब्लिक स्कूल में खेल-खेल में बच्चे रणनीति बनाना सीखते थे। नेपोलियन ने आगे चलकर भी ऐसा ही किया। युद्ध से पहले वे अच्छे से योजना बनाते। उनकी सेना हाइली मोटिवेटेड थी। यह सेना कभी कोई युद्ध हारती नहीं थी। इसलिए सबका मनोबल काफी ऊंचा होता था। इसका जिक्र स्वयं नेपोलियन बोनापार्ट ने एक साक्षात्कार में किया था। वाटरलू का युद्ध उनके जीवन का अंतिम युद्ध था जिसमें उनकी पराजय ड्यूक आॅफ वेलिंगटन के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना के हाथों हुई।
छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि आपके कर्मजीवन के आरंभ में आपकी पहचान आपकी शिक्षण संस्था से होती है पर आपका स्कूल और कालेज तक गौरवान्वित होता है जब उसकी पहचान आपसे होती है।
अंत में छात्र-छात्राओं को 100 फीसदी मतदान का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है पर इसे सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि सभी लोग अपने मताधिकार का उपयोग स्व विवेक से करें।

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