स्वरुपानंद महाविद्यालय में महिला दिवस पर परिचर्चा व पोस्टर प्रतियोगिता

Swaroopanand Mahavidyalayaभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में लैंगिक समानता इकाई एवं माईक्रोबायोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘महिलाओं के प्रति समानता का व्यवहार’ विषय पर परिचर्चा एवं ‘विज्ञान में महिलाओं की उपलब्धि’ विषय पर अंतर्महाविद्यालयीन पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. श्रीमती सिंधु अनिल मेनन, डायरेक्टर एवं प्राचार्य श्री शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय थीं। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने की। पोस्टर प्रतियोेगिता के निर्णायक के रूप में डॉ. संजू सिन्हा, सहायक प्राध्यापक शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर महाविद्यालय, डॉ. रीना कुलश्रेष्ठ रीडर रूंगटा डेंटल महाविद्यालय कोहका थीं। कार्यक्रम की प्रभारी स.प्रा. दुर्गावती मिश्रा ने परिचर्चा पर अपने विचार व्यक्त करते हुये महिलाओं को अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अधिकारों के प्रति भी सजग रहने की बात कही। डॉ. श्रीमती सिंधु अनिल मेनन, डायरेक्टर एवं प्राचार्य श्री शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय ने कहा कि महिलाओं का योगदान ना सिर्फ घर की चार दिवारी में अपितु अपने कार्यस्थल पर पूरी लगन के साथ अपने कार्य को अंजाम देते हुये दो गुना काम करतीं हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि महिलाओं ने विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिये हैं। महिलायें घर एवं बाहर दोनो क्षेत्र में बखूबी कार्य कर रहीं हैं लेकिन कभी-कभी महिलाओं के घरेलू कार्य को नजरअंदाज किया जाता है वास्तव में देखें तो कार्यालय कार्य समय सीमा से बंधा होता है किन्तु घरेलू कार्य की कोई सीमा अवधि नहीं होती है अत: महिला घर व बाहर की वह दूरी है जिसके बिना सशक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
डॉ. संजू सिन्हा स.प्रा. जन्तुविज्ञान, विश्वनाथ यादव तामस्कर महाविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि महिलाओं का दिन एक दिवस न होकर बल्कि वर्ष भर होता है, साथ ही वे रोज ही सम्मान की हकदार है।
डॉ. सावित्री शर्मा, डीन, शिक्षा विभाग, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुये प्राचीन शास्त्र में महिलाओं की सशक्त स्थिति का उल्लेख किया। डॉ. शमा बेग, विभागाघ्यक्ष ने कहा कि ईश्वर ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाया है। हर मुश्किल का वह अकेले सामना करने में सक्षम है। जरूरत है उसे अपने ऊपरी आवरण से बाहर निकलने की क्योंकि ‘शक्ति के बिना शिव शव मात्र है’।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों ने अपने विचार व्यक्त किये और कहा कि शिक्षित महिलाओं को आगे आकर को अधिकारों एवं कर्तव्यों का मूल्य समझना होगा क्योंकि नारी ही संतान के चरित्र एवं संस्कार की निर्मात्री है और समाज का आईना है। वह दशा और दिशा देने में सक्षम है।
पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम सोनिया गिल एवं सीता वर्मा, द्वितीय मरसी फर्नांडीस तथा तृतीय धात्री वर्मा को पुरस्कार प्रदान किया गया। मंच संचालन स.प्रा. दुर्गावती मिश्रा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शमा बेग ने दिया। कार्यक्रम में डॉ. पूनम निकूम्भ, डॉ. वी. सुजाता, डॉ. स्वाती पांडेय, डॉ. पूनम शुक्ला, स.प्रा. ज्योति शर्मा, स.प्रा. सुनीता शर्मा, स.प्रा. मंजुषा नामदेव की उपस्थिति सराहनीय रही।

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