स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में जल संरक्षण पर परिचर्चा का आयोजन

Water Conservation SSSSMVभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ग्रीन आडिट कमेटी द्वारा जल संरक्षण दिवस के अवसर पर लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से ‘किसी को पीछे नहीं छोड़ना है, क्यों, कैसे एवं उपाय’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. शमा बेग ने बताया विश्व की कुल 24 प्रतिशत जमीनी जल का उपयोग भारतीय करते है। देश में 11 प्रतिशत औसत बारिश होती है लेकिन हम मात्र 6 प्रतिशत पानी ही सुरक्षित रख पाते है। आंकड़े बताते है अभी भी 75 प्रतिशत घरों में पीने का साफ पानी नहीं पहुँच रहा है। गाड़ियों को धोने में करोड़ों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है इसके उचित प्रबंधन की आवश्यकता है। पानी दुर्लभ है। आज भी भारत की बहुत सी महिलाये छ: किलो मीटर दूर पानी लेने जाती है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने बताया कि मॉल आदि जगहों में फ्लैश सिस्टम है बहुत लोगों को उपयोग करना नहीं आता इससे बहुत सा पानी व्यर्थ बह जाता है। आज जगह-जगह कार वॉश सेंटर खुल गये हैं वहॉं बहुत सा पानी बह जाता है। जल संरक्षण का उपाय बताते हुये डॉ. शुक्ला ने बताया जल में सेंसर सिस्टम नहीं लगाना चाहिए क्योंकि हाथ हटाने के बाद भी कुछ समय तक पानी बहता रहता है उन्होंने बताया अगर पाईप लाईन में लीकेज है या नल में टोटी नहीं है पानी बह रहा है तो 1100 नंम्बर पर संपर्क कर सकते है।
स.प्रा. शिक्षा विभाग श्रीमती शैलजा पवार ने कहा वॉटर हार्वेस्ंिटग सिस्टम द्वारा बरसात के पानी को एकत्र करना चाहिए व तालाबों का नवीनीकरण कर सफाई पर ध्यान देना चाहिए साथ ही पौधे ज्यादा लगाना चाहिए स.प्रा. दुर्गावती मिश्रा ने बताया गाड़ी धोने के लिये नल की जगह बाल्टी का प्रयोग करें तो पानी कम खपत होगी।
स.प्रा. सुनीता शर्मा ने बताया नदियों को जोड़ना चाहिए इससे पानी संग्रहण करने में सहायता मिलेगी। स.प्रा. मंजुशा नामदेव ने बताया अगर हम घर में रोज उपयोग होने वाले पानी को पेड़ पौधों में डाले वो जमीन का वाटर लेवल बढेग़ा।
स.प्रा. श्वेता दवे ने बताया शेविंग व ब्रश करते समय नल को बंद रखा जाय तो पानी बचाया जा सकता है। कार्यक्रम में स.प्रा. श्वेता निर्मलकर, स.प्रा. कामिनी देशमुख, स.प्रा. प्रियंका चौपड़े, स.प्रा. राशि शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
परिचर्चा के बाद ग्रीन आडिट कमेटी ने निर्णय लिया की आसपास के रेस्टोरेंट में जाकर पानी पीने के बाद गिलास में जो पानी शेष रह जाता है उसे एकत्र कर पौधों में डालने के लिए प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. शमा बेग विभागाध्यक्ष माईक्रोबॉयोलॉजी व धन्यवाद ज्ञापन स.प्रा. उषा साहू शिक्षा विभाग ने किया।

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