स्वरूपानंद महाविद्यालय में बताई गई शोध पत्र प्रकाशन की बारीकियां

Workshop on Academic Researchभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय की सीओओ डॉ. मोनिषा शर्मा द्वारा शोध पत्र प्रकाशन के संबंध में व्याख्यान दिया गया। डॉ. मोनिषा ने बताया कि शोध पत्र प्रकाशन शोध हेतु एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। शोध पत्र बनाते समय हमें शोध संबंधी अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाओं से जूझना होता है और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का पता चलता है। उन्होंने विज्ञान विषय से संबंधित कई महत्वपूर्ण जर्नल की जानकारी दी जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र नि:शुल्क प्रकाशित किये जाते हैं। उन्होंने प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों को स्कोप्स एवं एससीआई जर्नल में शोधपत्र प्रकाशित कराने की सलाह दी। शोध पत्र प्रकाशित करने के पूर्व जर्नल के विषाय में ज्ञान का होना आवश्यक है। जर्नल किस विषय से संबंधित है? उसका इम्पैक्ट फैक्टर कितना है? उसका आई-टैन इनडैक्स क्या है? आईएसएसएन रजिस्टर्ड है अथवा नहीं इन सबके विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर ही पेपर छपवाना चाहिये।
शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को अपने शोध ग्रंथ का कॉपीराईट, रजिस्ट्रेशन भी करवाना चाहिये। गूगल स्कॉलर साइटेशन की सहायता से कितने लोगों ने उनके पेपर को और शोध कार्य को प्रमुखता से पढ़ा है इसकी जानकारी प्राप्त हो जाती है। सामाजिक विज्ञान विषय से संबंधित जरनल एसएससीआई जर्नल के विषय में भी उन्होंने विस्तार से जानकारी प्रदान की। डॉ. शर्मा ने अपने व्याख्यान में प्लेगियारिज्म के विषय में भी बताया तथा कहा कि शोध पत्र बनाते समय उपयोग में लाये गये पुस्तक, जर्नल एवं पत्र-पत्रिका का संदर्भ ईमानदारी से दें।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती हंसा शुक्ला ने कहा कि शोध कार्य में जुड़ने के साथ ही शोधार्थी को शोध पत्र का प्रकाशन नियमित रूप से कराते रहना चाहिये साथ ही जो प्राध्यापक शोध कार्य पूर्ण कर चुके हैं उन्हें अपने शोध कार्य की वर्तमान उपादेयता पर शोध पत्र बनाना और प्रकाशित करवाना चाहिये। उन्होंने समस्त शिक्षकों को अपने आकदमिक कार्यों को बढ़ावा देने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ. तृषा शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षा विभाग ने किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित हुये।

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