‘गली थिएटर’ में बस्ती के बच्चों की ग्रूमिंग कर रहीं सोनाली, निखरेगा व्यक्तित्व

Gally Theatreभिलाई। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बस्ती के बच्चों को भी अब वही अवसर मिलेगा जो पब्लिक स्कूलों या समर कैंप अटेंड करने वालों बच्चों को मिलता है। यह अवसर उन्हें दे रही हैं ‘स्वयंसिद्धा’ सोनाली चक्रवती। उन्होंने हफ्ते में तीन दिन इन बच्चों के नाम कर उन्हें वह सबकुछ देने का बीड़ा उठा लिया है जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ ही उनके व्यक्तित्व को भी निखार सके। विवाहित महिलाओं के हुनर को निखारकर उन्हें मंच पर लाने से शुरू हुआ डॉ सोनाली चक्रवर्ती का यह सफर अब रिसाली बस्ती की गलियों तक जा पहुंचा है। ‘गली थिएटर’ में वे इन बच्चों को न्यूज रीडर की तर्ज पर अखबार पढ़ना सिखा रही हैं। इसके साथ ही उनका उच्चारण सुधारने की कोशिश कर रही हैं। भिलाई। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बस्ती के बच्चों को भी अब वही अवसर मिलेगा जो पब्लिक स्कूलों या समर कैंप अटेंड करने वालों बच्चों को मिलता है। यह अवसर उन्हें दे रही हैं ‘स्वयंसिद्धा’ सोनाली चक्रवती। उन्होंने हफ्ते में तीन दिन इन बच्चों के नाम कर उन्हें वह सबकुछ देने का बीड़ा उठा लिया है जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ ही उनके व्यक्तित्व को भी निखार सके। विवाहित महिलाओं के हुनर को निखारकर उन्हें मंच पर लाने से शुरू हुआ डॉ सोनाली चक्रवर्ती का यह सफर अब रिसाली बस्ती की गलियों तक जा पहुंचा है। वे इन बच्चों को न्यूज रीडर की तर्ज पर अखबार पढ़ना सिखा रही हैं। इसके साथ ही उनका उच्चारण सुधारने की कोशिश कर रही हैं।इन बच्चों को भाषण देने की कला भी सिखाई जाएगी। इतना ही नहीं, अपने गली मोहल्ले की समस्याओं को समाचार की शैली में लिखकर और बोलकर प्रस्तुत करने की कला भी ये बच्चे सीखेंगे। डॉ सोनाली बताती हैं कि अगर आपके पास हुनर हो तो उसका कोई न कोई उपयोग तो होना ही चाहिए। हुनर का दान करने से बड़ा कोई दान नहीं होता। आपका दिया भोजन, कपड़ा, पैसा खत्म हो जाता है पर आपका दिया हुनर हमेशा उनके पास रहता है। हुनर हो तो व्यक्ति सफल हो ही जाता है। इन बच्चों को हुनरमंद बनाने के बाद इन्हें अवसर भी दिया जाएगा। ये बच्चे अपना स्क्रिप्ट खुद लिखेंगे और फिर उसकी एक शार्टफिल्म बनाई जाएगी। इससे न केवल इन बच्चों का हौसला बढ़ेगा बल्कि दुनिया भी उनकी क्षमताओं से परिचित हो पाएगी।
डॉ सोनाली ने बताया कि पहले उन्होंने इस शिविर को शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मरोदा टैंक के प्रांगण में ही शुरू करने की तैयारी कर ली थी। पर जब उनका उद्देश्य सामने आया तो प्राचार्य श्रीमती मिता रायचौधरी ने भरपूर सहयोग किया एवं बच्चों को इस व्यक्तित्व विकास कक्षा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रथम दिन क्लास में 4 बच्चे थे परंतु अगले ही दिन उसमें 36 बच्चे पहुंच गए। उत्साह दुगना हो गया। फिलहाल ये कक्षाएं शीतला मंदिर मरोदा टैंक के परिसर में चलती है। आसपास की बस्तियों एवं रिसाली के क्वार्टर से भी बच्चे इस शिविर में आते हैं। शिविर को संतोष रावत, शैलेश शेंडे, मुख्तार यादव, नगीना यादव एवं पूरे शीतला मंदिर समिति का भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने इस महति कार्य में आगे भी सहयोग करते रहने का वायदा किया है। इन बच्चों को क्रमश: हिंदुस्तानी संगीत, थिएटर ट्रेनिंग, व्यक्तित्व विकास, वक्तृत्व कला, आदि का निशुल्क प्रशिक्षण साल भर सिखाया जाएगा।
डॉ सोनाली ने बताया कि आगे चलकर ऐसी ही कक्षाएं रामनगर एवं रूआबांधा बस्ती में भी खोला जाएगा।

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