श्री शंकराचार्य महाविद्यालय के छात्रों ने किया सांध्यदीप का मंचन

भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं समान अवसर केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक था सांध्यदीप। एससीईआरटी के संतोष कुमार तम्बोली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सभागार में डी.एल.एड. छात्रों द्वारा स्वनिर्मित बैच, नारियल से गणेश, दीया, गमले, पॉट एवं फूलों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। महाविद्यालय में यू.जी.सी द्वारा संचालित समान अवसर केन्द्र ‘अवसर’ द्वारा सत्र 2011 से निरंतर विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रहा है।भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं समान अवसर केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक था सांध्यदीप। एससीईआरटी के संतोष कुमार तम्बोली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सभागार में डी.एल.एड. छात्रों द्वारा स्वनिर्मित बैच, नारियल से गणेश, दीया, गमले, पॉट एवं फूलों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। महाविद्यालय में यू.जी.सी द्वारा संचालित समान अवसर केन्द्र ‘अवसर’ द्वारा सत्र 2011 से निरंतर विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रहा है।भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं समान अवसर केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक था सांध्यदीप। एससीईआरटी के संतोष कुमार तम्बोली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सभागार में डी.एल.एड. छात्रों द्वारा स्वनिर्मित बैच, नारियल से गणेश, दीया, गमले, पॉट एवं फूलों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। महाविद्यालय में यू.जी.सी द्वारा संचालित समान अवसर केन्द्र ‘अवसर’ द्वारा सत्र 2011 से निरंतर विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रहा है।महाविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जे. दुर्गा प्रसाद राव ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि डी.एल.एड. के छात्रों की भूमिका हर क्षेत्र में प्रशंसनीय रही है वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण योग दिवस के अवसर पर उनकी भागीदारी रही तत्पश्चात छात्रों द्वारा छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत किया गया। डी.एल.एड. के छात्र पंकज ने अपने गीतों के माध्यम से ऐसा शमा बांधा की सभी मंत्रमुग्ध हो गये।
महाविद्यालय में यू.जी.सी द्वारा संचालित समान अवसर केन्द्र ‘अवसर’ द्वारा सत्र 2011 से निरंतर विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रहा है। डॉ. मालती साहू ने विगत 9वर्षों के कार्यों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभी तक हम अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं छात्राओं के हित में अनेक योजनाओं को क्रियान्वयन किया गया और आगे भी करते रहेगें। फरवरी 2016 में यू.जी.सी. ने अपनी योजनाओं में संशोधन करते हुए महाविद्यालय में अध्ययनरत् एवं कार्यरत अक्षम एवं वृद्ध जनों को इस योजना में सम्मिलित किया इसके अतिरिक्त संस्था के शैक्षणिक कमर्चारी, छात्र एवं उनके अभिभावक भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसी संदर्भ में समान अवसर केन्द्र द्वारा महाविद्यालय के सबसे वरिष्ठ कमर्चारी साजन वर्मा का सम्मान किया तत्पश्चात समाज में वृद्धो की स्थिति को उजागर करते हुए सांध्यदीप नामक नाटक का मंचन डी.एल.एड. के छात्रों द्वारा किया गया। नाटक के माध्यम से सरकार द्वारा चलाये गये विभिन्न योजनाओं, आर्थिक सुदृढ़ता एवं आत्मविश्वास को प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि श्री तम्बोली जी छात्रों को संबोधित करते हुए एस.सी.ई.आर.टी के पुराने पाठ्यक्रम एवं संशोधित पाठ्यक्रम के संदर्भ में जानकारी दी एवं बताया कि छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जिसमें कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक क्यू.आई.सी. कोड प्रारम्भ की। शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों से पाठ्यक्रम संबंधी सुझाव भी मांगे एवं छात्रों से प्रश्नोंत्तर के माध्यम से अपने विचार साझा किये।
महाविद्यालय की निदेशक एवं प्राचार्य डॉ. रक्षा सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी समस्या का समाधान विचार विमर्श से किया जा सकता है। अत: एक दूसरे से सही कम्युनिकेशन आवश्यक है। डी.एल.एड. प्रथम वर्ष में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया। श्री तम्बोली जी एवं साजन वर्मा द्वारा महाविद्यालय परिसर में पौधा रोपण किया गया। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीरा पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जयश्री वाकणकर ने किया इस अवसर पर डॉ. व्ही.के. सिंह शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. गायत्रीजय मिश्रा, श्रीमती कंचन सिंह, श्रीमती शिल्पा कुलकर्णी एवं अन्य समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहें।

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