अचार और इंसान में होता है फर्क, करना पड़ता है श्रम : डॉ वर्गीस

एमजे कालेज में स्टूडेन्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन

भिलाई। मैनेजमेन्ट गुरू एवं रूंगटा कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के डीन स्टूडेन्ट डेवलपमेन्ट प्रो. डॉ मनोज वर्गीस ने आज एमजे कालेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों को सेल्फ मैनेजमेन्ट के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि अचार और इंसान में फर्क होता है। अचार बर्नी में पड़े-पड़े अपनी गुणवत्ता बढ़ा लेता है जबकि मनुष्य को प्रति दिन स्वयं में सुधार के लिए चेष्टा करनी पड़ती है। भिलाई। मैनेजमेन्ट गुरू एवं रूंगटा कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के डीन स्टूडेन्ट डेवलपमेन्ट प्रो. डॉ मनोज वर्गीस ने आज एमजे कालेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों को सेल्फ मैनेजमेन्ट के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि अचार और इंसान में फर्क होता है। अचार बर्नी में पड़े-पड़े अपनी गुणवत्ता बढ़ा लेता है जबकि मनुष्य को प्रति दिन स्वयं में सुधार के लिए चेष्टा करनी पड़ती है। भिलाई। मैनेजमेन्ट गुरू एवं रूंगटा कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के डीन स्टूडेन्ट डेवलपमेन्ट प्रो. डॉ मनोज वर्गीस ने आज एमजे कालेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों को सेल्फ मैनेजमेन्ट के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि अचार और इंसान में फर्क होता है। अचार बर्नी में पड़े-पड़े अपनी गुणवत्ता बढ़ा लेता है जबकि मनुष्य को प्रति दिन स्वयं में सुधार के लिए चेष्टा करनी पड़ती है। खरगोश और कछुए की कहानी से अपना वक्तव्य प्रारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि ओवर कांफिडेंट खरगोश को कछुआ अपनी धीमी पर लगातार प्रगति से पराजित कर देता है। यह कहानी तो सबको पता है पर इसके बाद क्या होता है, उसकी जानकारी कम लोगों को है। अपनी पराजय से खीझा हुआ खरगोश आत्मनिरीक्षण करता है। वह पाता है कि ओवर कांफिडेंस के कारण उसने अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग नहीं किया। वह दूसरी दौड़ के लिए कछुए को ललकारता है। दूसरी दौड़ वह जीत जाता है। कछुआ भी इस हार से खिन्न होता है। उसे पता होता है कि वह खरगोश से तेज नहीं दौड़ सकता। पर उसे कुछ ऐसा आता है जो खरगोश को नहीं आता। वह तीसरी दौड़ का आयोजन करता है पर मार्ग स्वयं तय करता है। इस मार्ग में एक नदी पड़ती है। खरगोश तट पर पहुंच कर रुक जाता है जबकि कछुआ आराम से तैरकर दौड़ पूरी कर लेता है। अब तक दोनों में दोस्ती हो जाती है और फिर इसी मार्ग पर दोनों मिल कर आगे बढ़ते हैं। स्थल पर खरगोश कछुए की मदद करता है और जल में कछुआ खरगोश की। दोनों कम समय में साथ-साथ दौड़ पूरी कर लेते हैं।
डॉ वर्गीस ने कहा कि यह किस्सा हमें कई सीखें देता है। पहला यह कि क्षमता होने पर भी ओवर कांफिडेन्स के कारण हमारी पराजय हो सकती है। हमें अपनी प्रत्येक हार के बाद आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। अपनी कमियों को दूर करके हम सफल हो सकते हैं। अलग अलग क्षमताओं (कोर स्ट्रेंथ) वाले साथ मिलकर एक टीम के रूप में काम कर सकते हैं और बेहतर नतीजे दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस कथा के पहले भाग से हमें यह सीख मिलती है कि निरंतर प्रयास करने वाला सफल होता है। जबकि अंतिम भाग हमें बताता है कि किस तरह टीम भावना के साथ काम करके हम अपने निष्पादन को भी बेहतर बना सकते हैं। आज कार्य को अच्छे से करने मात्र से काम नहीं चलेगा, उसे कम से कम समय में पूरा भी करना होगा।
उन्होंने जीवन में परिजनों, दोस्तों और गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये आपके सच्चे मित्र हैं जो आपको आईना दिखाते हैं और आपकी कमियों को आपकी नजर में लाते हैं। इससे आप स्वयं में सुधार करते हुए स्वयं को बेहतर बनाते चले जाते हो। मनुष्य अचार नहीं है जो बरनी में पड़ा-पड़ा अपनी गुणवत्ता को बढ़ा लेता है। मनुष्य को निरंतर आत्मावलोकन एवं सुधार के द्वारा ही अपनी मंजिल को प्राप्त करना होता है।
आरंभ में एमजे कालेज की डायरेक्टर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में कम्फर्ट जोन से निकलकर प्रतिदिन स्वयं को ही टारगेट देना होगा और उसे अचीव करने की कोशिश करनी होगी। इससे हमें न केवल अपने कोर स्ट्रेंथ का पता चलेगा बल्कि हम अपनी कमियों की पहचान कर उसे दूर करने में भी सफल होंगे।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्राचार्य डॉ कुबेर सिंह गुरुपंच ने कहा कि जीवन में समय प्रबंधन एवं अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य चुनना ही श्रेष्ठ है। इसमें आपकी परफारमेन्स अन्यों की तुलना में श्रेष्ठ हो सकती है। यदि उद्देश्य को सामने रखकर समयबद्ध प्रयास किये जायें तो सफलता मिलकर रहती है।
कार्यक्रम का संचालन कामर्स एंड मैनेजमेन्ट के सहा. प्राध्यापक सौरभ मंडल ने किया। विभाग के प्रभारी आशीष सोनी एवं सहा. प्राध्यापक दीपक रंजन दास ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर छात्र संघ प्रभारी डॉ जेपी कन्नौजे, शिक्षा संकाय से अर्चना त्रिपाठी, ममता एस राहुल, शकुन्तला जलकारे, गायत्री गौतम, उर्मिला यादव, नेहा महाजन एवं नर्सिंग कालेज की तारामती डोगरे भी उपस्थित थीं।

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