स्वरुपानंद महाविद्यालय में गुरू पूर्णिमा पर महिला सेल द्वारा विविध कार्यक्रम

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में महिला प्रकोष्ठ द्वारा गुरू पूर्णिमा के अवसर पर ‘गुरू के रूप में महिलाओं का सक्रिय योगदान’ विषय पर स्लोगन, पोस्टर एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. तृषा शर्मा ने कहा कि गुरू का स्थान हमारे जीवन में ईश्वर से भी ऊपर है क्योंकि वह हमें ईश्वर से मिलाते हैं। गुरू हमें ज्ञान ही नहीं देते हमारा मार्गदर्शन भी करते हैं, गुरू के प्रति आभार एवं कृतज्ञता को अभिव्यक्त करने के लिये गुरू पूणिर्मा पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। गुरू वह है जो हमारे अंधकार भरे जीवन में ज्ञान का प्रकाष फैलाते हैं।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में महिला प्रकोष्ठ द्वारा गुरू पूर्णिमा के अवसर पर ‘गुरू के रूप में महिलाओं का सक्रिय योगदान’ विषय पर स्लोगन, पोस्टर एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. तृषा शर्मा ने कहा कि गुरू का स्थान हमारे जीवन में ईश्वर से भी ऊपर है क्योंकि वह हमें ईश्वर से मिलाते हैं। गुरू हमें ज्ञान ही नहीं देते हमारा मार्गदर्शन भी करते हैं, गुरू के प्रति आभार एवं कृतज्ञता को अभिव्यक्त करने के लिये गुरू पूणिर्मा पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। गुरू वह है जो हमारे अंधकार भरे जीवन में ज्ञान का प्रकाष फैलाते हैं।Guru-Shishya-Paintingमहाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरू के बिना शिष्य अधूरा और शिष्य के बिना गुरू अधूरा होता है। एक अच्छे शिष्य से गुरू की पहचान होती है। आज वर्तमान में हमें अपने गुरू के आदर्शों एवं विचारों पर चलने की आवश्यकता है।
महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने गुरू के साथ बिताये पलों एवं उनके आदर्षों को याद किया। बी.कॉम. प्रथम वर्ष की छात्रा उन्नति पांडेय ने अपने गुरू के बारे में बताया कि मेरी माँ ही मेरी गुरू एवं अच्छी मित्र है, मैं चाहती हूं की वो मेरे आस-पास रहे क्योंकि वो मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। दामिनी साहू, बी.कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा ने अपने नृत्य के साथ अनुभव को साझां किया जिसमें उसने अपने गुरू के विचारों को व्यक्त किया कि वे कहते थे मैं रहूँ या ना रहूँ आपको निरंतर परिश्रम करते रहना है। बी.कॉम प्रथम वर्ष अवन्तीका सिंह ने अपने गुरू को मार्गदर्शक एवं प्रेरणा स्त्रोत बताया। दिशा यादव, बीबीए प्रथम सेम ने भी अपने गुरू को धन्यवाद देते हुये उनके आदर्शों पर चलने की बात कही।
अवन्तय शुक्ला, बीबीए प्रथम ने कहा मैं डॉ. अब्दुल कलाम को अपना गुरू मानता हूं। अपने अभिव्यक्ति में डॉ. कलाम की कही गई दो पंक्तियां सपने वो नहीं होते है जो हम सोते हुये देखते है सपने वो होते हैं जो खुली आंखों से देखे जाते है यह हमेशा मुझे प्रेरणा देते हैं। बी.कॉम प्रथम वर्ष छात्रा फिजा एवं नित्या ने भी अपने शिक्षकों को प्रेरणाश्रोत बताया एवं अच्छे परीक्षा परिणाम के लिये उनका आभार व्यक्त किया। समृद्धि तिवारी बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा ने अपने अनुभव में बताया कि उनके गुरू के प्रोत्साहन से ही उनका दसवी में परीक्षा परिणाम 10 सीजीपीए प्राप्त हुआ।
सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य, पूजा सोढ़ा ने कहा कि हम सारा ज्ञान गूगल द्वारा नही सीख सकते हमें अपने आस-पास के लोगों एवं परिवार एवं पालक से सीखना चाहिये। सहा.प्रा. शिक्षा विभाग श्रीमती शैलजा पवार ने अपने प्रथम गुरू अपनी माँ को माना एवं बताया माँ के आदर्शों एवं संस्कारों के कारण ही वह हर कठिन परिस्थियों से जूझना सीखी। विभागाध्यक्ष, माईक्रोबायोलॉजी डॉ. शमा बेग ने बताया जैसे असाढ़ में चाँद छुपा होता है वैसे ही गुरू छुपा होता है शिष्य को उसे ढूंढना है। गुरू जीवन की हर बाधांओं को दूर करता है।
प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार:-
स्लोगन प्रतियोगिता में विश्वदीप, आयुषि द्विवेदी, फिजा, पोस्टर प्रतियोगिता में तन्नू विश्वकर्मा, मानसी कोब्जे तथा अतुल मिश्रा तथा भाषण प्रतियोगिता में अवन्त्य शुक्ला, समृद्धि पाण्डेय, उन्नति पाण्डेय को क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। भाषण प्रतियोगिता का सांत्वना पुरस्कार दामिनी साहू को दिया गया। प्राध्यपकों के लिए आयोजित स्लोगन प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार श्रीमती शैलजी पवार को तथा द्वितीय पुरस्कार श्रीमती मंजू कन्नौजिया को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अजीता सजिथ, स.प्रा. वाणिज्य एवं स.प्रा. शिक्षा विभाग, उषा साहू ने विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं समस्त छात्र-छात्रायें उपस्थित हुये। कार्यक्रम में मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तृषा शर्मा, प्रभारी, महिला प्रकोष्ठ (एसोसिएट प्रो. शिक्षा विभाग) ने किया।

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