स्वरुपानंद महाविद्यालय में विद्याथिर्यों ने सीखी मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाना

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया जिसमें विद्यार्थियों ने अपने घर से मिट्टी लाकर मूर्ति बनाना सीखा। पिडिलाइट फेविक्रिल कंपनी की सुपर टीचर श्रीमती विनीता गुप्ता ने प्रशिक्षण प्रदान किया। प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने बताया कि बढ़ते हुए प्रदूषण के इस दौर में पीओपी से बनी गणेश प्रतिमाएं पानी में घुलती नहीं हैं और सालों साल उसी तरह पड़ी रह जाती हैं। यह जल स्रोतों को खराब करने के साथ ही प्रदूषण का भी कारण बनता है।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया जिसमें विद्यार्थियों ने अपने घर से मिट्टी लाकर मूर्ति बनाना सीखा। पिडिलाइट फेविक्रिल कंपनी की सुपर टीचर श्रीमती विनीता गुप्ता ने प्रशिक्षण प्रदान किया। प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने बताया कि बढ़ते हुए प्रदूषण के इस दौर में पीओपी से बनी गणेश प्रतिमाएं पानी में घुलती नहीं हैं और सालों साल उसी तरह पड़ी रह जाती हैं। यह जल स्रोतों को खराब करने के साथ ही प्रदूषण का भी कारण बनता है। भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया जिसमें विद्यार्थियों ने अपने घर से मिट्टी लाकर मूर्ति बनाना सीखा। पिडिलाइट फेविक्रिल कंपनी की सुपर टीचर श्रीमती विनीता गुप्ता ने प्रशिक्षण प्रदान किया। प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने बताया कि बढ़ते हुए प्रदूषण के इस दौर में पीओपी से बनी गणेश प्रतिमाएं पानी में घुलती नहीं हैं और सालों साल उसी तरह पड़ी रह जाती हैं। यह जल स्रोतों को खराब करने के साथ ही प्रदूषण का भी कारण बनता है।उन्होंने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों से मिट्टी के गणेश की ही स्थापना घर पर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गणेश प्रतिमा बनाते समय एक बीज मिट्टी में मिला दे जिससे विर्सजन के उपरान्त यदि आप उसे गमले में विर्सजित करें तो एक पौधा विकसित होगा जो आपको स्मृति दिलाएगा।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. मोनिषा शर्मा सीओओ श्री शंकराचार्य नर्सिंग कॉलेज उपस्थित रही। उन्होंने विद्यार्थियों की रूचि की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसी तरह सभी लोग यदि अपने घरो में मिट्टी के गणेश की स्थापना करें तो वातावरण हमेशा प्रदूषण रहित रहेगा व मूर्ति खरीदने में होने वाला खर्च भी बचेगा।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. रचना पॉण्डेय ने बताया कि मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने का मुख्य कारण पर्यावरण को सुरक्षित करना है। विद्याथिर्यों द्वारा बनाई गई मूर्तियों की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें प्रथम पुरस्कार- पूजा साहू, उजमा खातून, अक्षिता पाण्डेय उत्तम कुमार को दिया गया। द्वितीय पुरस्कार हितेश वर्मा, उज्ज्वल झा, मयंक सोनी, तथा तृतीय पुरस्कार श्रेया, लाभेष, विशाल शिवानी सिंग शर्मा व एस.मिनी को प्रदान किया गया। प्रशस्ती पुरस्कार आयुषी, समृध्दि तिवारी, ट्विंकल को दिया गया।
मंच संचालन डॉ. निर्धारिका देवांगन प्रभारी आईक्यूएसी ने किया। ग्रीन ऑडिट कमेटी की प्रभारी डॉ. शमा बेग, डॉ. रजनी मुदलियार, स.प्रा. पूजा सोढा, स.प्रा. दीपक सिंग, स.प्रा. जिगर भवसार आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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