स्वरूपानंद महाविद्यालय में हरेली पर लगाए पेड़, चढ़े गेड़ी

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में हरेली उत्सव का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न कार्यक्रम कराये गये। महाविद्यालय परिसर को विद्यार्थियों द्वारा नीम और आम के पत्तों से बने तोरन से सजाया गया। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिये हरी हरे वेशभूषा एवं श्रृंगार प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्राध्यापक एवं विद्यार्थी पत्ती एवं फूलों से बने गहने पहनकर परिसर में उपस्थित हुये। महाविद्यालय परिसर में हरियाली की छटा देखते ही बनती थी।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में हरेली उत्सव का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न कार्यक्रम कराये गये। महाविद्यालय परिसर को विद्यार्थियों द्वारा नीम और आम के पत्तों से बने तोरन से सजाया गया। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिये हरी हरे वेशभूषा एवं श्रृंगार प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्राध्यापक एवं विद्यार्थी पत्ती एवं फूलों से बने गहने पहनकर परिसर में उपस्थित हुये। महाविद्यालय परिसर में हरियाली की छटा देखते ही बनती थी। विद्यार्थी महाविद्यालय अध्यापन के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति से रूबरू हुुये इसके लिये सेक्टर-04, शासकीय प्राथमिक शाला में प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला एनएसएस के विद्यार्थी एवं एनएसएस अधिकारी दीपक सिंह तथा अन्य प्राध्यापकों द्वारा विद्यालय में कृषि में उपयोग आने वाले उपकरण, गेड़ी आदि की पूजा की गई तथा विद्यालय परिसर में फलदार वृक्ष लगाये गये। विद्यालय तथा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने गेड़ी में विविध करतबों का प्रदर्शन किया।
महाविद्यालय के स्टॉफ हेतु हरे वेशभूषा प्रतियोगिता में डॉ. शमा बेग, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी को हरेली क्वीन एवं अशैक्षणिक स्टॉफ से अमित देशलहरा को हरेली किंग का खिताब मिला तथा विद्यार्थियों में बी.कॉम प्रथम की फिजा फिरदोस, सोमल, रेणुका सेन एवं सांत्वना पुरस्कार जसप्रीत सिंह को दिया गया। मेहंदी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सोनाली सिंग (बी.कॉम. प्रथम), द्वितीय टी. बबीता (बी.एड.), अकांक्षा (बीएससी प्रथम) एवं सांत्वना दिक्षा को दिया गया। तोरन बनाओ प्रतियोगिता में बीएससी प्रथम की पूजा साहू, समृद्धि तिवारी और प्रिया त्रिपाठी के तोरन को पुरस्कृत किया गया।
महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने हरेली त्यौहार पर सभी प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को बधाई दी एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति को बच्चों में जागरूकता लाने के लिये इस तरह के आयोजन की सराहना की।
इस कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि महाविद्यालय परिसर में पारंपरिक त्यौहारों के आयोजन से विद्यार्थी अपनी संस्कृति से परिचित होते हैं तथा हरेली का त्यौहार यह संदेष देता है कि इस मौसम में जमीन में बीज डालने से वह अंकुरित होकर पौधे से पेड़ बनता है जो सृजन का प्रतीक है। हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ में किसानों की खुशहाली एवं धन-धान्य की संपन्नता के लिये मनाया जाता है।
स्वस्थ्य अभ्यास कमेटी की संयोजिका डॉ. रचना पांडेय ने कहा कि हरेली उत्सव पर विद्याथिर्यों के बीच विभिन्न प्रतियोगिता कराने का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति से जोड़ना साथ ही साथ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त करना है। आम और नीम के पत्तों का तोरन वर्षाऋतु में मच्छरों और कीड़ों से बचाव है। संस्कृति कमेटी की संयोजिका डॉ. स्वाती पांडेय ने सभी स्टॉफ एवं विद्यार्थियों को हरेली के अवसर पर अधिक से अधिक पौधा लगाकर उसे संरक्षित रखने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्रीन आॅडिट कमेटी की संयोजिका डॉ. शमा बेग, एनएसएस प्रभारी दीपक सिंह, विविध प्रतियोगिताओं के जज डॉ. रजनी मुद्लियार, डॉ. नीलम गांधी एवं श्रीमती मीना मिश्रा थीं।

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