रूंगटा पब्लिक स्कूल में दादा-दादी, नाना -नानी संग बच्चों ने बिताए खुशी के पल

भिलाई। बच्चों में संस्कार भरने वाले दादा-दादी और नाना-नानी हर घर की बुनियाद होते हैं तथा यही वह पीढ़ी है जो बच्चों को व्यवहारिक्ता के साथ साथ संस्कारित भी करते हे ताकि भविष्य में ये बच्चे अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ कर सकने मे सक्षम बने। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संजय रूंगटा गु्रप आॅफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा संचालित रूंगटा पब्लिक स्कूल में 13 सितम्बर को गैं्रड पैरेंटस डे समारोह का भव्य आयोजन किया गया।भिलाई। बच्चों में संस्कार भरने वाले दादा-दादी और नाना-नानी हर घर की बुनियाद होते हैं तथा यही वह पीढ़ी है जो बच्चों को व्यवहारिक्ता के साथ साथ संस्कारित भी करते हे ताकि भविष्य में ये बच्चे अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ कर सकने मे सक्षम बने। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संजय रूंगटा गु्रप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस द्वारा संचालित रूंगटा पब्लिक स्कूल में 13 सितम्बर को ग्रैंड पैरेंटस डे समारोह का भव्य आयोजन किया गया। भिलाई। बच्चों में संस्कार भरने वाले दादा-दादी और नाना-नानी हर घर की बुनियाद होते हैं तथा यही वह पीढ़ी है जो बच्चों को व्यवहारिक्ता के साथ साथ संस्कारित भी करते हे ताकि भविष्य में ये बच्चे अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ कर सकने मे सक्षम बने। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संजय रूंगटा गु्रप आॅफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा संचालित रूंगटा पब्लिक स्कूल में 13 सितम्बर को गैं्रड पैरेंटस डे समारोह का भव्य आयोजन किया गया।इस मौके पर बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु ग्रुप के चेयर मैन संजय रूगटा एवं डायरेक्टर (श्रीमती) रजनी रूंगटा, सीईओ अरूप मुखोपाध्याय, एच एम अमिताब बंधोपाध्याय एवं एचओपी दीप्ती सिंह एवं समस्त स्टाफ उपस्थित थे। समारोह में कक्षा नर्सरी से कक्षा पहली तक के बच्चों के दादा-दादी और नाना -नानी को विषेश रूप से आमंत्रित किया गया।
सर्वप्रथम ज्ञान की बगिया के नन्हें -नन्हें नर्सरी के बच्चों ने अपनी तोतली भाषा से कविता प्रस्तुत कर सभी दषर्को को खुश कर दिया तत्पश्चात एल के जी के बच्चों द्वारा डांस की प्रस्तुति दी गई और सभी का खूब मनोरंजन किया। यू के जी के बच्चों द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति से सभी ने तालियों से बच्चों को उत्साहित किया और कक्षा पहली के बच्चों ने ओल्ड इज गोल्ड गानों में शानदार प्रस्तुति देकर दषर्कों से तालियाँ बटोरीं।
इस आयोजन की विभिन्न रोचक प्रतियोगिताओं में जोरदार भागीदारी कर दादा-दादी और नाना-नानी ने अपने बचपन को याद किया तथा साथ ही गायन, साज-सज्जा, बच्चों की मुसकान पहचानना, बॉल इन द बास्केट, बच्चों के साथ ट्वीस्ट आदि विभिन्न प्रतियोगिताओं को देखना अपने आप में एक रोचक अहसास था।
इन बुजुर्गों ने अपनी प्रतिभा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस अनूठे आयोजन ने बच्चों और बुजुर्गों को एक कर दिया। इस मौके पर चेयरमेन संजय रूगटा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि हमारे जीवन की अनमोल पूंजी हमारे बच्चों की खुशी है। उन्होंने उनके खुषहाल जीवन की कामना की। शाला के सीईओ अरूप मुखोपाध्याय ने कहा कि बच्चों के बड़े- बुजुर्गों ने इस समारोह में आकर न सिर्फ बच्चों की हौसला -अफजाई की, बल्कि उनका मान भी बढ़ाया है। बच्चों को संस्कारवान बनाने में घर के बुजुर्गों की बड़ी भूमिका होती है। एचओपी दीप्ती सिंह ने गैं्रड पैरेंटस का स्वागत किया और अपने उद्बोधन में कहा कि बाल्यावस्था का समय ऐसा होता है, जिसमें बच्चों में जिस तरह के संस्कार डाल दिए जाते है, वैसा ही उनका व्यक्तित्व बन जाता है क्योंकि आज की व्यस्त दिनचर्या में ये काम घर के बड़े – बुजुर्ग ही कर सकते है। कार्यक्रम में सभी दादा-दादी और नाना-नानी ने अपने – अपने अनुभव को सूचना पटल पर लिखा।

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