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स्वरूपानन्द महाविद्यालय में विश्व कैंसर दिवस पर अतिथि व्याख्यान

भिलाई। स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय में आईक्यूएसी एवं महिला सेल के संयुक्त तात्वावधान में ‘कैंसर कारण व निदान’ पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में डॉ. मानसी गुलाटी स्त्री रोग विषेशज्ञ रमेशचन्द्र फाउंडेशन उपस्थित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने की। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये महिला सेल प्रभारी डॉ. तृषा शर्मा ने कहा आज भारत ही नहीं विश्व की अधिकांश महिलायें कैंसर से पीड़ित हैं।भिलाई। स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय में आईक्यूएसी एवं महिला सेल के संयुक्त तात्वावधान में ‘कैंसर कारण व निदान’ पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में डॉ. मानसी गुलाटी स्त्री रोग विशेषज्ञ रमेशचन्द्र फाउंडेशन उपस्थित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने की।कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये महिला सेल प्रभारी डॉ. तृषा शर्मा ने कहा आज भारत ही नहीं विश्व की अधिकांश महिलायें कैंसर से पीड़ित हैं। जागरूकता के अभाव के कारण तृतीय या चतुर्थ स्टेज में उसका पता चलता है और इलाज संभव नहीं हो पाता। लोगों में जागरुकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डॉ. मानसी गुलाटी ने अपने उद्बोधन में कहा सरवाइकल कैंसर, बच्चेदानी, ब्रेस्ट कैंसर इस प्रकार के कैंसर है जिसका प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाये तो इसका इलाज संभव है। विश्व में कैंसर से मरने वालों की संख्या 14 प्रतिशत है वहीं भारत में यह 21 प्रतिशत है। जागरूकता के अभाव के कारण प्रारंभिक अवस्था में पता नहीं चलता व दूसरे स्टेज में पता चलता है। इलाज में देरी होती है तब तक और देर हो चुका होता है। कैंसर में सेल तेजी से बढ़ने लगता है अगर पहले स्टेज में पता चल जाये तो मरीज को बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अधिक सफेद पानी जाना, गंध आना, ब्लीडिंग ज्यादा होना, थकावट, पैरों में सूजन आना, बार-बार इन्फेक्शन होना आदि कैंसर के लक्षण है। तम्बाखू, गुड़ाखू, इन्फेक्शन, असंतुलित भोजन, जेनेटिक आदि के कारण कैंसर अधिक होता है। साथ ही अनियमित खान-पान, वजन का अधिक होना, शारीरिक मेहनत न करना, कोलस्ट्रॉल व शुगर का अधिक बढ़ा होना आदि भी कैंसर के कारण बनते हैं। कई बार महिलायें अपने ब्लाउज के अंदर मोबाईल रखती है व जो पुरुष अपनी जेब में मोबाईल रखते है उनको ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर है या नहीं इसकी जांच स्वयं कर सकते है। ब्रेस्ट में गुठली तो नहीं है, रिंकल या लाल तो नहीं है, खुजली तो नहीं है, गड्डे तो नहीं है निप्पल अंदर तो नहीं चला गया है 30 से 50 तक खतरे की उम्र है पर 50 के बाद यह रिस्क बढ़ जाता है।
कैंसर का इलाज बताते हुये डॉ. गुलाटी ने बताया आॅपरेशन से प्रभावित अंग को काट के निकाला जा सकता है। इसके बाद रैडियोथैरेपी व किमोथैरेपी मुख्य इलाज है।
प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कैंसर से बचाव का सबसे अच्छा तरीका जागरूक होना है। परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक को तुरन्त दिखवाएं। अगर कैंसर निकलता है तो उसे जड़ से दूर करने का प्रयास करें। लोगों को जागरुक करने का प्रयास करे जिससे लोगों के जीवन की रक्षा की जा सके क्योंकि कैंसर भयावह रोग है इसलिये इसे कर्क रोग कहते है।
कार्यक्रम में मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तृषा शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर ने दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला सेल सदस्य डॉ. अजीता सजीत स.प्रा. उषा साहू ने विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापिकायें व छात्रायें उपस्थित हुर्इं।

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