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स्वरूपानंद महाविद्यालय में मशरूम उत्पादन पर कार्यशाला का आयोजन

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में बायोटेक एवं बॉटनी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय मशरूम उत्पादन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सेवा समिति से दिनेश सिंह प्रशिक्षक के तौर पर उपस्थित हुये। इस मशरूम उद्यमिता कार्यशाला में छात्रों ने आॅयस्टर मशरूम उत्पादन की विधि को सीखा। इसमें स्वरूपानंद, साई महाविद्यालय व रूंगटा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में बायोटेक एवं बॉटनी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय मशरूम उत्पादन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सेवा समिति से दिनेश सिंह प्रशिक्षक के तौर पर उपस्थित हुये। इस मशरूम उद्यमिता कार्यशाला में छात्रों ने आॅयस्टर मशरूम उत्पादन की विधि को सीखा। इसमें स्वरूपानंद, साई महाविद्यालय व रूंगटा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में बायोटेक एवं बॉटनी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय मशरूम उत्पादन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सेवा समिति से दिनेश सिंह प्रशिक्षक के तौर पर उपस्थित हुये। इस मशरूम उद्यमिता कार्यशाला में छात्रों ने आॅयस्टर मशरूम उत्पादन की विधि को सीखा। इसमें स्वरूपानंद, साई महाविद्यालय व रूंगटा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये संयोजक डॉ. निहारिका देवांगन ने बताया कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के उपरांत विद्यार्थी कम लागत में मशरूम का उत्पादन कर सकते है। पैरे के उपयोग के कारण यह सस्ता व पर्यावरण के अनुकूल है। यह विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का भी हिस्सा है।
ट्रेनर दिनेश सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थी स्वयं का उत्पादन युनिट खोल सकते है। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अनुदान राशि दी जाती है। बैंक से लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। दिनेश सिंह के द्वारा मशरूम उत्पादन के विविध चरण जैसे- बीज उत्पादन, पेरा में मिलावट उष्मायन अवधि पैरे की सिंचाई आदि की जानकारी दी गई।
महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुये कहा छात्रों को इस प्रकार के प्रशिक्षण के माध्यम से स्वावलंबी बनाया जा सकता है साथ ही स्वरोजगार के लिये प्रेरित किया जा सकता है। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने छात्रों को प्रशिक्षण के अनुभव का लाभ उठाने की सलाह दी व कहा शासकीय व अशासकीय योजनाओं में आवेदन कर सहायता प्राप्त कर सकते है व स्वरोजगार के रूप में स्वयं अपना सकते है, व लोगो को भी इसमें जोड़ सकते है।
सांई महाविद्यालय से उपस्थित मोमेश्वर ने अपने अनुभव व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से वे लाभान्वित हुुये हैं। मशरूम उत्पादन की विधि अत्यंत सरल है अपने घर मे ही इसकी शुरूवात करेंगे।
रूंगटा महाविद्यालय की आयुषी दुबे ने बताया कि इस तकनीकी से उन्हें दोगुना फायदा हुआ है। यह उनकी आमदनी का जरिया भी हो सकता है। कार्यशाला में 58 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. शमा ए. बेग एवं डॉ चैताली मैथ्यु उपस्थित हुई।

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