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स्वरूपानंद महाविद्यालय में गणित विभाग द्वारा ऊर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन

Science Day celebrated in Swami Swaroopanand Saraswati Mahavidyalayaभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’ के अवसर पर ‘विज्ञान के द्वारा विकास संभव है’ विषय पर गणित विभाग द्वारा परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में डॉ. नीलम गांधी विभागाध्यक्ष वाणिज्य व डॉ. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी उपस्थित हुई। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये स.प्रा. मीना मिश्रा विभागाध्यक्ष गणित ने कहा विश्व विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान के द्वारा विकास के आयामों को रेखांकित करने के उद्देश्य से परिचर्चा का आयोजन किया गया जिससे विद्यार्थी विज्ञान के आविष्कारों का प्रयोग मानव हित में करने के लिये सचेत हो।प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा आज विकास की जिन ऊंचाइयों को हम छू रहे हैं वह ऊर्जा के दोहन से संभव हुआ है विकास हुआ तो धरती विनाश के कगार तक भी पहुंच गई है।
स्वरूपानंद महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने कहा ऊर्जा के भंडार सीमित है। अत: इसका संरक्षण संवर्धन करना आवश्यक है। हमें ऊर्जा के नए संसाधनों के विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।
निर्णायक डॉ. सुनीता वर्मा ने कहा आज ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोत समाप्त होते जा रहे है अत: उनको संरक्षण के लिये जागरूक होना आवश्यक है।
निणार्यक डॉ. नीलम गांधी ने ऊर्जा और विकास के परंपरागत संबंधो पर प्रकाश डाला।
परिचर्चा में प्राची गजभिये बी.एस.सी. तृतीय वर्ष ने बताया विज्ञान ने विकास के नये आयाम गढ़े है। विज्ञान के प्रयोगो के कारण हम मंगलयान तक पहुच पाये हैं। यातायात व संचार सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई है उसका कारण विज्ञान ही है।
रितेश वर्मा बी.एस.सी. प्रथम वर्ष ने बताया कि जहां विज्ञान ने पृथ्वी को स्वर्ग बनाया है वहीं उसके अविष्कारों ने सम्पूर्ण पृथ्वी को बम के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। हिरोशिमा नागासाकी में अभी भी जन्म लेने वाले बच्चे पर रेडियो धर्मिता का दुष्प्रभाव है। वे अपंग व बिमारियों से ग्रस्त जन्म ले रहे है। साथ ही सोसलमीडिया का दुरुप्रयोग प्रत्यक्ष है।
साक्षी शुक्ला बीएससी द्वितीय वर्ष ने ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूशण व विश्व के नष्ट होने के खतरो का कारण विज्ञान को बताया। विज्ञान के कारण ही विश्व में विकास संभव हुआ है व आज हम जिन सुविधाओं का उपयोग कर रहे है वह विज्ञान की ही देन है।
ऐश्वर्या चंद्राकर ने विज्ञान के कारण ही हम चिकित्सा, उद्योग, संचार के क्षेत्रो में बहुत उन्नति किये है व सम्पूर्ण विष्व ग्लोबल विलेज में परिवर्तित हुआ है।
विजय कुमार बी.एस.सी. तृतीय वर्ष ने कहा विज्ञान के कारण ही औद्योगीकरण संभव हुआ है मनुष्य चांद तक पहुचा वही धार्मिक आस्था कमजोर हो रही है बढ़ते प्रदूशण के कारण धरती का संतुलन बिगड़ रहा है विज्ञान के प्रयोग से विकास भी कर सकते है व इसकेदुष्परिणामों पर भी काबू पाया जा सकता है।।
प्रतियोगिता में इन बच्चों को पुरस्कृत किया गया। प्रथम – रितिश वर्मा- बी.एस.सी (प्रथम), द्वितीय – गर्विता अग्रवाल – बीएससी (तृतीय), तृतीय – प्राची गजभिये – बीएस.सी. (तृतीय)
कार्यक्रम को सफल बनाने में स.प्रा. टी. बबीता स.प्रा. निषा पाठक ने विषेश योगदान दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन व धन्यवाद स.प्रा. मीना मिश्रा विभागाध्यक्ष गणित ने किया

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