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रिमोट सेंसिंग तकनीक ने जीवन को बनाया सरल और सुविधाजनक : डॉ वर्मा

साइंस कालेज में भौतिक शास्त्र का आमंत्रित व्याख्यान, ग्लोबल प्वाइंटिंग सिस्टम से रोक सकते हैं प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण

Science College Durg Remote Sensingदुर्ग। आजादी के बाद भारत ने अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करते हुए लगातार प्रगति की ओर एक मात्र ऐसा प्रगतिशील देश बना जो आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विकसित देशों की बराबरी कर रहा है। संचार के इस दौर में भारत की कहानी इसरो के बिना अधूरी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में आई क्यू ए सी तथा भौतिकशास्त्र विभाग द्वारा रिमोट सेंसिंग पर एक आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें स्पेस एप्लीकेशन सेंटर इसरो से आये हुए डॉ. अतुल वर्मा वैज्ञानिक ने व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए एमएससी तृतीय सेमेस्टर भौतिक शास्त्र की प्रतीक्षा तिवारी ने डॉ. अतुल वर्मा का संक्षिप्त परिचय दिया। डॉ. अतुल वर्मा ने रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीपीएस), रिमोट सेंसिंग, राडार, उपग्रह संचार को विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि रिमोट सेसिंग दूरस्थ घटनाओं का अवलोकन कर उसकी गतिविधियों को संदर्भित करता है, इसमें सेंसर सीधे घटनाओं के संपर्क में ना आकर विद्युत चुंम्बकीय विकिरण वाहकों द्वारा कार्य करता है, इसके द्वारा बादलों को ट्रैक कर मौसम परिवर्तन या चक्रवात आदि के बारे में प्रारंभ होते ही प्रभावित क्षेत्रों को सतर्क कर देता है तथा इसका उपयोग युध्द क्षेत्र में दुश्मनों की गतिविधियों को जानने में भी किया जाता है। इसके साथ कैमरे के उपयोग द्वारा उपग्रहों को महासागरोें के तापमान परिवर्तन की छवियों को बनाने में तथा जंगल में फैली आग को अंतरिक्ष से मैप किया जा सकता है। डॉ. अतुल वर्मा ने बताया ग्लोबल प्वाइंटिंग सिस्टम के द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को रोका जा सकता है, इस दिशा में काफी प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ उन्होने अपने 30 वर्ष से अधिक शोध अनुभव को विस्तार पूर्वक समझाया तथा भविष्य में समुद्र और वायुमण्डल से संबंधित प्राचलों को भी परिभाषित किया, उन्होने बताया कि हमारे दैनिक जीवन को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए रिमोट सेंसिंग उपयोगी है। एम.एस.सी प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर भौतिक तथा रसायन शास्त्र के विद्याथिर्यों ने प्रष्नो को पुछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया। धन्यवाद ज्ञापन एम.एस.सी तृतीय सेमेस्टर भौतिक शास्त्र की प्रतिक्षा तिवारीे द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. आर एन सिंह, डॉ. पूर्णा बोस, डॉ. जगजीत कौर सलूजा, डॉ. अनिता शुक्ला, सीतेष्वरी चंद्राकर, डॉ. अजय सिंह, के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। आई क्यु ए. सी. संयोजक डॉ. जगजीत कौर सलूजा ने बताया कि पृथ्वी पर भूमि, जल जंगल आदि प्राकृतिक संसाधनो का क्षरण हो रहा है एैसी स्थिति में प्राकृतिक संसाधनो की पहचान कर उसको बचाने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए, प्राकृतिक संसाधनो को बचाना हमारे लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ बहुत आवष्यक है। उन्होने विद्याथिर्यों को इसरों में इंटर्नषिप प्रोग्राम में अपनी सहभागिता देने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. आर.एन. सिंह ने इस आमंत्रित व्याख्यान की सफलता के लिए बधाई देते हुए भौतिक शास्त्र विभाग के इस प्रयत्न की प्रषंसा की तथा हर्ष व्यक्त किया। इस व्याख्यान के द्वारा विद्याथिर्यों ने रिमोट सेंसिंग, संचार उपग्रह से संबंधित बड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर उसके अनुप्रयोगों के बारे में जाना।

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