संभल कर करें विषय और कोचिंग संस्थान का चयन – डॉ प्रशांत श्रीवास्तव

Dr Prashant Shrivastava speaks on how to choose subject and career

दुर्ग। हेमचंद विश्वविद्यालय के डीन छात्र कल्याण डॉ प्रशांत श्रीवास्तव ने हाईस्कूल के विद्यार्थियों को आगाह किया है कि वे सहपाठियों की देखादेखी या परिवार के दबाव में आकर विषय का चयन न करें। चूंकि विषय को लेकर आगे उन्हें ही बढ़ना है इसलिए अपनी अभिरुचि एवं सामर्थ्य के अनुरूप ही विषय का चयन करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थाओं का चयन करते समय भी हमें युक्तियों से काम लेना चाहिए। सभी कोचिंग संस्थानों का स्तर अलग-अलग होता है। इसलिए हमें पहले डेमो क्लासेस अटेंड करना चाहिए। अनुकूल होने पर ही संस्था में दाखिला लेना चाहिए।डॉ प्रशांत श्रीवास्तव का दीर्घ शैक्षणिक अनुभव है और वे छात्र तथा पालकों के साथ पिछले अनेक वर्षों से सतत् रूप से जुड़े हुए हैं। विशेषकर 10वीं के बच्चों के विषय में उनका कहना है कि अकसर मार्कशीट धोखा देते हैं इसलिए विषय चयन के लिए उसे आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। कभी कभी अच्छी तैयारी के बावजूद कई कारणों से विद्यार्थी को अपने प्रिय विषय में कम अंक आ जाते हैं। इसी तरह कभी-कभी संयोगवश उन विषयों में अच्छे अंक प्राप्त हो जाते हैं जिनमें उसकी रुचि या दक्षता नहीं होती। इसलिए यदि अंकसूची को आधार बनाकर विषय ले लिया गया तो आगे चलकर भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी तरह विषय या संस्था का चयन यह देखकर भी नहीं करना चाहिए कि अधिकांश मित्र वहां दाखिला ले रहे हैं। केन्द्र का चयन इस आधार पर भी नहीं होना चाहिए कि वह अपने घर के पास है और आने जाने की सुविधा रहेगी। परिवार अपनी सुप्त इच्छाओं को भी बच्चों पर न थोपें कि फलां विषय लेने पर रिश्तेदार या पारीवारिक मित्र क्या कहेंगे। इस बात को कोई मायने नहीं है कि परिवार में एक डाक्टर होना चाहिए या इंजीनियर होना चाहिए। बच्चे का सहज स्वाभाविक विकास और अद्वितीय सफलता इसमें निहित है कि उसकी रुचि और क्षमताएं क्या हैं।
कोचिंग संस्थानों के चयन पर भी डॉ श्रीवास्तव की राय महत्वपूर्ण है। वे बताते हैं कि सभी कोचिंग संस्थानों का स्तर अलग अलग होता है। यदि बच्चे ने केवल नाम देखकर किसी अच्छी संस्था में दाखिला ले भी लिया तो हो सकता है उसे वांछित परिणाम न मिलें। यदि विषय पर बच्चे की पकड़ मामूली या न के बराबर है तो उसे किसी ऐसी संस्था का चयन करना चाहिए जहां विषय के आधार को मजबूत करने पर बल दिया जाता हो। इसका पता लगाने के लिए बच्चे को डेमो क्लास अटेंड करना चाहिए। उपयुक्त महसूस होने पर ही दाखिला लेना चाहिए। अन्यथा वह कोचिंग आता-जाता रहेगा पर इच्छित परिणाम नहीं आएंगे।
बदलते रहते हैं करियर एवं अवसर
डॉ श्रीवास्तव बताते हैं कि करियर एवं अवसर समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए जानकारों के साथ बैठकर इस बात पर भी चर्चा करनी चाहिए कि फलां विषय का 5 या 10 साल में कैसा भविष्य है। वे उदाहरण देते हैं कि एक समय था छात्र सिविल इंजीनियरिंग को नकारकर मैकेनिकल की ओर जाते थे। इलेक्ट्रानिक्स, कम्प्यूटर साइंस या आईटी की ओर जाते थे। पर आज स्थिति बदल चुकी है। ऐसा इसलिए है कि किसी भी क्षेत्र में एक नियत समय के बाद कुछ समय के लिए सैचुरेशन (संतृप्ति) आ जाती है। कुछ समय के लिए वहां रोजगार के अवसर बेहद सीमित हो जाते हैं। इसलिए विषय का चयन करते समय भविष्य का ध्यान रखा जाना चाहिए।
हजारों विषय लाखों करियर संभावनाएं
डॉ प्रशांत श्रीवास्तव कहते हैं कि आज शाखा-प्रशाखा सहित हजारों विषय हैं और अनगिनत करियर विकल्प हैं। इसलिए छात्र यदि अपनी रूचि एवं क्षमता के आधार पर विषय का चयन करता है तो वह किसी भी विषय में अच्छी प्रगति हासिल कर सकता है।

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