Kathak Dr Sarita Shrivastava Bhilai

आत्मा को तृप्त करती है नृत्य की कथक शैली- डॉ सरिता श्रीवास्तव

भिलाई। वैसे तो सभी नृत्य तन एवं मन को एक सूत्र में पिरोकर साध देते हैं किन्तु कथक का लचीलापन, कथा कहने की उसकी शैली आत्मा को तृप्त कर देती है। यही वजह है कि कथक का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है। कथक समय के साथ अपने स्वरूप को बदलता गया है। भावातिरेक की अपनी विशिष्टता के कारण यह मंदिर से लेकर दरबार तक, हिन्दी फिल्मों से लेकर स्कूल के मंच तक हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रहा है। यह कहना है कथक नृत्यांगना एवं गुरू डॉ सरिता श्रीवास्तव का।  Kathak Dr Sarita Shrivastava Bhilaiसरिता को कथक की प्रेरणा अपनी माता मालती सिन्हा से मिली। वे चाहती थीं कि सरिता कथक को उन ऊंचाइयों तक लेकर जाए जहां पूरी दुनिया में उसे दाद मिले। पर एक दुखद घटना में उन्होंने 11 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया। पर कथक को उन्होंने नहीं छोड़ा। वे नृत्य करती रहीं। स्कूल-कॉलेज में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार और खिताब जीते। आज भी वे प्रस्तुतियां देती हैं। दर्शकों को कुछ न कुछ नया देने का निरंतर प्रयास करती रहती हैं।
डॉ सरिता ने इंदिरा संगीत कला विश्वविद्यालय खैरागढ़ से उपाधि प्राप्त की। हिन्दी साहित्य में एमए किया। फिर एमफिल और पीएचडी किया। सम्प्रति वे धनोरा उच्चतर माध्यमिक शाला में सेवारत हैं। उन्होंने रायपुर के प्रतिष्ठित राजकुमार कालेज, ज्ञानगंगा अकादमी में अपनी सेवाएं दी हैं। रीवां में रहने के दौरान वे घर पर ही बच्चियों को नृत्य की शिक्षा देती रही हैं। पर कर्म जीवन की व्यस्तता ने बाद के वर्षों में इसमें एक अंतराल ला दिया। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2002 में उनके पति डॉ प्रशांत श्रीवास्तव के साथ वे भी रायपुर आ गईं। 2004 में वे दुर्ग शिफ्ट हो गए तो उन्होंने डीपीएस ज्वाइन कर लिया। बीएनएस और क्रीडेन्स अकादमी के साथ भी उन्होंने कुछ समय तक काम किया।
मार्च 2020 में जब कोविड के कारण लॉकडाउन की घोषणा हो गई और बाद में वर्क फ्रॉम होम का चलन प्रारंभ हुआ तो उन्हें एक बार फिर इसका अवसर मिल गया। उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल प्रारंभ किया और मुफ्त में कथक का प्रशिक्षण देने लगीं। उनके चैनल के आज दर्जनों सब्सक्राइबर हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है। यह एक लाइव क्लास है।
वे कहती हैं कि कथक भी नृत्य, नाट्य एवं अभिनय की मिश्रित अभिव्यक्ति है। पर इसके लिए किसी विशेष तामझाम की जरूरत नहीं होती। सामान्य वेशभूषा में भी आप कथक कर सकते हैं। इस शैली में काफी लचीलापन है। कथक को लेकर जितने प्रयोग हुए वह अन्य विधाओं में विरल हैं। प्रख्यात कथक कलाकार बिरजू महाराज ने इसे प्रयोग के लिए इतना मुक्त कर दिया कि कथक के सभी घराने इससे प्रभावित हुए। यह कुछ-कुछ अक्षर ज्ञान प्राप्त करने के बाद शब्दों से खेलने जैसा है। आपको अपनी पहचान बनानी होती है। एक विशिष्टता स्थापित करनी होती है। वे स्वयं रायगढ़ घराने घराने की डॉ सुचित्रा हरमलकर की शिष्या हैं। उन्होंने रामलाल गुरूजी से भी कथक का ज्ञान प्राप्त किया। पर यह नहीं कह सकतीं कि किसी और घराने का उनपर कोई छाप नहीं पड़ा।
डॉ सरिता को कथक में लीन हो जाना अच्छा लगता है। वे कहती हैं कि यह आपको न केवल दैनन्दिन तनावों और दुश्चिंताओं से परे ले जाता है बल्कि आत्मा को तृप्त कर देता है। आप कथक के माध्यम से अपने मन के सभी भावों को व्यक्त कर सकते हैं। यह कुछ-कुछ अपना सुख-दुख किसी अपने के साथ बांटने जैसा है। आप कह देते हैं और आपके मन पर पड़ा बोझ हट जाता है।  डाउन और फिजिकल डिस्टेंसिंग के इस दौर में कथक आपका परम मित्र बन सकता है।

7 thoughts on “आत्मा को तृप्त करती है नृत्य की कथक शैली- डॉ सरिता श्रीवास्तव

  1. All d best dear Sarita…congrats…keep on going…sahi hi…abhivyakti ka sashakt maadhyam hi nritya evan sangeet hi…

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