दुर्ग साइंस कालेज में पांच दिवसीय ऑनलाईन इंग्लिश फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम

Faculty Development programme at Science college Durgदुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के अंग्रेजी विभाग द्वारा 1 से 5 जुलाई तक पांच दिवसीय ऑनलाईन फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आज के बदलते परिवेश में शिक्षा, शिक्षण एवं शोध से संबंधित पद्धतियों द्वारा नये विषयों बहुविषयों के अंतर्गत सामाजिक एवं सामायिक बदलाव एवं अन्य जानकारियां उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ सोमाली गुप्ता ने सभी अतिथियों, देश एवं विदेश जैसे मोरक्को, अरमेनिया, फिलीपिन्स, सरबिया, यूएई, पाकिस्तान एवं अन्य देशों से जुड़े सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम की महत्ता पर प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष डॉ मीता चक्रवर्ती ने महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ आरएन सिंह एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया।
प्राचार्य डॉ आर.एन. सिंह ने अपने उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों को इस कार्यक्रम से होने वाले लाभ एवं अन्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंग्रेजी विभाग को इस आयोजन के लिए शुभकामनायें एवं आशीर्वाद प्रदान किया। अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापक डॉ सुचित्रा गुप्ता ने प्रथम दिन के अतिथि वक्ता इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, पुणे के डायरेक्टर डॉ अशोक थोराट का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनका स्वागत किया।
डॉ अशोक थोराट ने अपने विषय डिजिटल ह्यूमैनिटीज को परिभाषित करते हुए बताया कि ह्यूमैनिटीज कम्प्यूटिंग से विकसित डिजिटल मानविकी के विषयों पर विद्वानों की गतिविधियों का एक विस्तृत क्षेत्र है। डिजिटल ह्यूमैनिटीज को स्कालरशिप करने के नए तरीके के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें सहयोगी, ट्रांसडिसिप्लीन और कंपुटेशनल रूप से लगे शोध, शिक्षण और प्रकाशन शामिल है।
फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के दूसरे दिन दिनांक 2 जुलाई को डॉ दीपानविता श्रीवास्तव द्वारा क्रिटिकल इन्क्वायरी इन फॉरेन पैडागॉजी इन इंडिया, एक्सप्लोरिंग न्यू एरीयाज ऑफ रिसर्च पर प्रस्तुतिकरण किया गया। डॉ दीपानविता श्रीवास्तव, डिसिप्लिन फ्रेंच, स्कूल ऑफ फॉरेन लेंग्वेजेस, इग्नू नई दिल्ली, की विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने अत्यंत ही गहन विचारों की व्याख्या करते हुए रिसर्च: शोध, दर्शन, शोध का वास्तविक अर्थ शुध्दिकरण फिल्ट्रेशन, रिसर्च के प्रकार गुणात्मक एवं परिमाणात्मक तुलनात्मक इतिहासिक ज्ञानवर्धन एवं ज्ञान सर्जन इत्यादि का उल्लेख करते हुए भारत में विदेशी भाषाओं में रिसर्च पर विशेष प्रकाश डाला। साथ ही आज के परिपेक्ष्य में डिजिटल टूल्स की महत्ता एवं ओपन एक्सेस रिर्सोसेस पर जानकारी उपलब्ध कराई। कार्यक्रम के अंत में डॉ कमर तलत के डॉ श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुतिकरण को संक्षिप्त रूप में श्रोताओं के सन्मुख रखते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। तत्पश्चात् प्रश्नों के माध्यम से विशेष चर्चा में कई प्रतिभागियों ने अपनी भागीदारी दी।
दिनांक 3 जुलाई को एब्लिज्म, स्पेशीसिज्म एन्ड रिसर्च: ए (पोस्ट) पैंडेमिक पर्सपैक्टिव विषय पर प्रस्तुतिकरण के लिए वी.जी. वजे कॉलेज, मुलुंड, मुंबई के अग्रेजी विभाग के ऐसासिएट प्रोफेसर डॉ दिनेश कुमार नायर आमंत्रित थे। उनका व्याख्यान नवीनतम, ज्ञानवर्धक एवं रोचकता से परिपूर्ण होने के साथ ही डॉ नायर ने सामाजिक एवं सामायिक कोविड-19 के दौरान पॉलिटिक्स ऑफ रिसर्च के तहत समाज में विशेष वर्गों में फैलती असमानता, सदियों से चली आ रही गलत धारणाओं से जुड़ी पूर्वाग्रह जैसे कि रेसिज्म सेक्सिम, एजिजम ने किस प्रकार रिसर्च कल्चर प्रभावित किया। इत्यादि अत्यंत ही प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।
डिसएविलिटी थ्योरी, सोशल डार्विनिज्म से उत्पन्न नई आडियोलॉजी, प्राणियों के प्रति क्रूरता, एनीमल पर्सनहुड जैसे अनेक गंभीर विषयों पर रिसर्च के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर जानकारी उपलब्ध कराई। डॉ तरलोचन कौर संधू द्वारा डॉ दिनेश नायर की प्रस्तुति पर विभिन्न बिंदुओं का संक्षिप्त विवरण देते हुए धन्यवाद प्रेषित किया। अंत में डिस्कशन, क्वरीज एवं उनके उत्तरों के साथ ही कार्यक्रम संयोजक डॉ सोमाली गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के चौथे दिन हिसलप कॉलेज, नागपुर के अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रांतीक बैनर्जी आमंत्रित थे। पैट्रो फिक्शन, पेट्रो कल्चर, एज ऑफ होरर रिज्म एवं कल्चर ऑफ टेरेरिज्म, 9-11 फिक्स फ्रोनेसिस एंड नाडा, जिरोन्टोलोजी स्टडीज, एजिंग एवं विभिन्न प्रकार की डिसएबीलिटी, बायोपोलिटिक्स एवं बायोपावर, वर्तमान में पैडेमिक, कॉनल्कर स्टडीज इत्यादि में रिसर्च के स्कोप को अत्यंत ही रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन के पूर्व विभाग की डॉ मर्सी जॉर्ज द्वारा विशेष बिन्दुओं को संक्षिप्त रूप से प्रेषित करते हुए डॉ प्रांतीक बैनर्जी को धन्यवाद दिया। प्रश्नोत्तर सेशन के साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ।
अंतिम दिन दिनांक 5 जुलाई को स्कूल ऑफ स्टडीज इन इंग्लिश, विक्रम युनिवर्सिटी उज्जैन, म.प्र. से डॉ रूबल वर्मा अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित थे। उनका विषय यूटेलिटेरियन इंटीग्रेशन ऑफ नॉलेज डायमैन शन्स थ्रू इंटर डिसिपिल्नेरी रिसर्च इन लिटरश् से संबंधित था। अपने प्रस्तुतिकरण में उन्होंने विषयों एवं बहुविषयों में शोध की नई पध्दतियों से संबंधित विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की। इस क्षेत्र में शोध से नए आयाम एवं नई तकनीकी जानकारियां भी उन्होंने प्रदान की। डॉ सुचित्रा गुप्ता ने उक्त व्याख्यान की समाप्ति पर संक्षिप्त रूप में विशेष बिन्दुओं पर प्रकाश डालते हुए प्रश्नोत्तर सेशन के लिए प्रतिभागियों को आमंत्रित किया। डॉ सोमाली गुप्ता ने अतिथि वक्ताओं द्वारा अपना बहुमूल्य समय देने, ज्ञानवर्धन के लिए एवं देष विदेष से जुड़े 500 डैलीगेट्स एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए डॉ सुचित्रा गुप्ता ने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.एन. सिंह, डॉ सोमाली गुप्ता (कार्यक्रम संयोजक), विभागाध्यक्ष डॉ. मीता चक्रवर्ती, डॉ कमर तलत, डॉ सुरेखा जैन, डॉ मर्सी जॉर्ज, डॉ तरलोचन कौर, डॉ मीना मान एवं विशेष रूप से तकनीकी सहायता के लिए शासकीय महाविद्यालय के अंग्रेजी के सहायक प्राध्यापक डॉ विकास पंचाक्षरी एवं सीएसआईटी दुर्ग के प्राध्यापक डॉ चंद्रशेखर शर्मा को धन्यवाद दिया।

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