पाटणकर कन्या महाविद्यालय में गोधन के सहउत्पादों पर राष्ट्रीय वेबीनार

Cow Dung By Productsदुर्ग। शासकीय डॉ वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में गोधन के सहउत्पादों में कॅरियर के अवसर पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। गौकृति संस्थान जयपुर (राजस्थान) के डायरेक्टर भीमराज इस वेबीनार के मुख्य वक्ता थे। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था गौकृति में गाय के गोबर से पेपर का निर्माण किया जाता है जिससे वे रजिस्टर, डायरी, कैलेण्डर और विभिन्न सजावटी उत्पाद तैयार करते है। इन उत्पादों को भारत के बाजार में ही नहीं विदेशों में भी मांग बढ़ी है। उन्होंने इस पर विस्तार से जानकारी दी। वेबीनार की संयोजक डॉ रेशमा लाकेश ने इस आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को गोधन पर आधारित व्यवसाय, शोध एवं प्रशिक्षण देना तथा कौशल विकास करना है। कोविड-19 के कारण आज अपना कॅरियर स्थानीय स्तर पर आरंभ कर सस्ते और आसानी से उपलब्ध संसाधन का प्रयोग कर कौशल विकास करना महत्वपूर्ण है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सुशील चन्द्र तिवारी ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना पर प्रकाश डाला और कहा कि गोधन निर्मित उत्पाद सस्ते, सुंदर व पर्यावरण के हितार्थ सुरक्षित होते है।
वेबीनार में नागपुर के स्वानंद गोविज्ञान केन्द्र के संस्थापक जितेन्द्र भाखने एवं डॉ भाग्यश्री भाखने उनके केन्द्र से निर्मित विभिन्न उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले मोल्डज और मशीनों की तकनीकी जानकारी दी। उन्होनें अपने केन्द्र में चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में बताया तथा कहा वे 30 युवाओं की टीम बनाकर उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षित कर प्रेरित करते है। नागपुर के स्वयं सहायता समूह की संचाालक श्रीमती यामिनी निलेश अबंलिवदे ने उनके समूह द्वारा निर्मित गोधन उत्पादों की विस्तृत जानकारी दी।
करनाल (हरियाणा) के वेदिक प्लास्टर के मार्केटिंग हेड प्रदीप कुमार बेनीवाल ने उनके संस्थान द्वारा निर्मित वेदिक प्लास्टर एवं गोधन ब्रिक्स पर जानकारी दी।
वेबीनार में उपस्थित पद्मश्री शमशाद बेगम ने स्वसहायता समूह के लिए इसके प्रशिक्षण की व्यवस्था पर जानकारी ली।
डॉ मयंक रिहान ने विशेषज्ञों से इन उत्पादों के वैज्ञानिक मापदंड पर जानकारी चाही। आस्ट्रेलिया से शारदा पटेल ने वेदिक ब्रिक्स के निर्माण पर अपनी उत्सुकता जाहिर की।
ऋषभ बिल्डर के अभिलेश कटारिया द्वारा वेदिक ब्रिक्स एवं प्लास्टर की संभावनाओं पर प्रश्न पूछे गए। पर्यावरण वैज्ञानिक अनिता सावंत, रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के सिविल विभाग के हेड डॉ लोकेश सिंह ने भी अपने सुझाव दिए।
एपोपिया से डॉ राधा चैधरी भी इस वेबीनार से जुड़ी उन्होनें आॅनलाईन ट्रेनिंग का सुझाव दिया जिससे इसका लाभ सभी को मिल सके। वेबीनार में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों के साथ उद्योग से जुड़े लोग एवं गणमान्य नागरिक तथा समाजसेवियों ने भी सहभागिता दी।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति भरणे ने किया।

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