महात्मा गांधी की जीवनशैली से दे सकते हैं कोविड को मात – डॉ सिंह

Political Science Webinarदुर्ग। कोविड-19 जनित समस्याएं एवं गांधी दृष्टि विषय पर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी आयोजित की गयी। वेब संगोष्ठी में डॉ सतीष राय पूर्व विभागाध्यक्ष एवं निदेषक नेहरू शोधपीठ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं राष्ट्रीय संयोजक राजीव गांधी स्टडी सर्किल तथा डॉ बी. एम. शर्मा पूर्व कुलपति कोटा विश्वविद्यालय तथा पूर्व अध्यक्ष राजस्थान लोक सेवा आयोग मुख्य वक्ता थे। वेब संगोष्ठी के संयोजक डॉ शकील हुसैन ने विषय प्रवर्तन में बताया कि देष के पच्चीस राज्यों से प्रतिभागियों से पंजीकरण प्राप्त हुआ। प्राचार्य डॉ आर. एन सिंह ने अपने स्वागत भाषण में इस बात पर जोर दिया कि महात्मा गांधी द्वारा बताए गए आत्मनिर्भरता, स्वालम्बन और स्वच्छता के उपायों को अपना कर ही इस महामारी का सामना सफलता पूर्वक कर सकते हैं। डॉ सतीष राय ने कोविड जनित राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं यथा प्रवसन, आर्थिक मंदी के लिए गांधी जी द्वारा बताए गए विकेन्द्रीकरण के मार्ग पर निष्ठापूर्वक चलने पर बल दिया। प्राकृतिक संसाधनों के अनैतिक व अतार्कित विदोहन के स्थान पर ग्रामीण स्वावलम्बन ग्रामीण स्वराज को समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया। मुख्य अतिथि और प्रख्यात गांधीविद् डॉ बी.एम. शर्मा ने गांधीजी के आश्रमों फिनिक्स, टोलस्टाय और साबरमती आदि की जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर बल दिया कि यदि हम उस आश्रम जीवन शैली का पालन करें तो कोविड-19 जैसी आपदाओं का सफलता पूर्वक सामना कर सकते है। गांधीजी द्वारा अपनायी गयी ग्रामीण चिकित्सा पध्दति, आयुर्वेदिक औषधियों आदि के प्रयोग पर प्रकाश डाला। ज्ञातव्य है कि डॉ शर्मा ने गांधी जी के आश्रम जीवन पर विस्तृत शोध कार्य किया है तथा इनकी आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ वेदवती मण्डावी ने वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति, समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ राजेन्द्र चौबे, वाणिज्य के विभागाध्यक्ष डॉ ओ.पी. गुप्ता, डॉ ए.के. खान आईक्यूएसी के सदस्यों और समस्त महाविद्यालय परिवार को सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। 31 अगस्त को डॉ वेदवती मण्डावी की सेवानिवृत्ति थी। इस अवसर पर विभाग और महाविद्यालय द्वारा उन्हें भावभीनी बिदाई दी गयी। डॉ मण्डावी ने अपने सेवाकाल में महाविद्यालय द्वारा दिए गए स्नेह और सहयोग के लिए भावनात्मक आभार व्यक्त किया।

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