स्वरूपानंद महाविद्यालय में शिक्षक दिवस पर प्रतियोगिता का आयोजन

Teachers Day Competitionभिलाई। डॉ. राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष पर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय शिक्षा विभाग ने शिक्षक दिवस पर ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया। विद्यार्थियों को अपने अनुभव को साझा करते हुए लेख, कविता, संस्मरण का वीडियो बनाकर भेजना था। प्रतिभागियों ने प्रथम गुरु के रूप में उन्होंने केवल शिक्षक का ही नहीं अपितु किसी रिश्तेदार, मित्र या अनजान व्यक्ति के सन्दर्भ में अपने विचार व्यक्त किये, जिनके कारण उनकी सोच में परिवर्तन हुआ और जिन्दंगी की दिशा बदल गयी।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. दुर्गावती मिश्रा ने कहा गुरु कोई भी हो सकता है वह माता-पिता या अन्य रिश्तेदार हो सकता है जो हमें पल-पल मार्गदर्शन एवं निर्देशन देते रहते हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि शिक्षक कुम्हार की भांति होता है जो कच्ची मिट्टी रूपी शिष्य को सुंदर आकार देकर उसके भविष्य का निर्माण करता है।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे – प्रथम- नीलम यादव बी.एड.- तृतीय सेमेस्टर ,द्वितीय- संयुक्ता एम एड प्रथम सेमेस्टर ,तृतीय- ज्योति कुमारी और पूजा कुशवाहा एम एड प्रथम सेमेस्टर , सांत्वना- श्रीमती हेमा शर्मा (शिक्षिका- कुसमुंडा कोरबा)। कार्यक्रम के निर्णायक डॉ सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिंदी डॉ. नीलम गांधी विभागाध्यक्ष वाणिज्य रहे। शिक्षा विभाग के समस्त प्राध्यापकों ने कार्यक्रम की सफलता पर बधाई दी।
शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ पूनम निकुंभ ने कहा कि विद्यार्थी बी.एड. प्रशिक्षण के दौरान कठिन प्रशिक्षण प्राप्त कर एक आदर्श शिक्षक बनकर उत्कृष्ट समाज की रचना करते हैं। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. पूनम शुक्ला श्रीमती शैलजा पवार और उषा साहू ने अपना सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में बी.एड. की प्रथम सेमेस्टर की छात्रा कुमारी नीलम यादव ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि शिक्षक द्रोणाचार्य की भांति होते हैं जो हमें अणु परमाणु विज्ञान संज्ञान सब विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं और एक अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं| एम एड प्रथम सेमेस्टर की छात्रा कुमारी पूजा कुशवाहा ने विद्यार्थी की तुलना कच्ची मिट्टी से की है गुरु ने मिट्टी को सुन्दर मूर्ति का रूप दिया। एम.एड. प्रथम सेमेस्टर की संयुक्ता ने माता-पिता को शिक्षक के समतुल्य माना जो हमें अच्छे संस्कार प्रदान करते हैं। एम.एड. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा ज्योति कुमारी ने अपने इतिहास शिक्षक के बारे में संस्मरण बताया कि उनके पढ़ाने का तरीका इतना अच्छा था कि ऐसा प्रतीत होता था कि सारी घटनाएं हमारे समक्ष घटित हो रहे हैं।
श्रीमती हेमा शर्मा शिक्षिका ने अपने संस्मरण में कहा कि एक संत के प्रवचन से मेरे जीवन में बदलाव आया किहम अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ईश्वर से मन्नत मांगते हैं और हमारी इच्छाएं कभी तृप्त नहीं होती हमें याचक न होकर ईश्वर पर विश्वाश करना चाहिए कि वह हमारे लिए जो करेंगे अच्छा ही होगा| प्रियंका इक्का, भारती, पल्लवी यादव बी.एड. विद्यार्थियों ने प्रथम गुरु के सम्बन्ध में विचार व्यक्त किये।

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