हेमचंद विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर ऑनलाइन वीडियो स्पर्धा के विजेता घोषित

Hemchand Yadav Universityदुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर ऑनलाइन वीडियो प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा कर दी गई है। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय दुर्ग की डॉ मर्सी जार्ज, एमजे कालेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ अनिल कुमार चौबे एवं साइंस कालेज की डॉ विजयलक्ष्मी नायडू को क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया है।इस प्रतियोगिता का आयोजन सितंबर 2020 में विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अंदर आने वाले समस्त महाविद्यालयों के प्राध्यापकों तथा नियमित विद्यार्थियों हेतु किया गया था। दुर्ग विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ प्रशान्त श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रतियोगिता हेतु बड़ी संख्या में महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं नियमित विद्यार्थियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। विश्वविद्यालय की कुलपति, डॉ अरूणा पल्टा की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 से जुड़े विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। सभी विजेताओं को विश्वविद्यालय द्वारा ई-प्रमाणपत्र शीघ्र प्रेषित किये जायेंगे।
विजेताओं की सूची इस प्रकार है – शिक्षक संवर्ग के परिणामः- डॉ मर्सी जार्ज, सहा. प्राध्यापक, अंग्रेजी विभाग, शास. विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग – प्रथम, डॉ अनिल कुमार चौबे, प्रभारी प्राचार्य, एम.जे. कॉलेज, भिलाई- द्वितीय तथा डॉ विजय लक्ष्मी नायडू, सहा. प्राध्यापक, वनस्पतिशास्त्र विभाग,शास. विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विद्यार्थी संवर्ग में वी. पुष्पा कुमारी, बीएड द्वितीय सेमे., भिलाई मैत्री कॉलेज – प्रथम, मंजीत कुमार, बीएससी गणित-द्वितीय वर्ष, शास. चन्दूलाल चन्द्राकर महाविद्याल, धमधा – द्वितीय, अमिषा घोष, बी कॉम अंतिम वर्ष – तृतीय, चांदनी शर्मा, शोध छात्रा (वाणिज्य विभाग) शास. विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग – विशेष पुरस्कार में स्थान प्राप्त किये हैं।
दुर्ग विश्वविद्यालय की कुलपति, डॉ अरूणा पल्टा ने बताया कि शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों संवर्गों में बहुत ही अच्छी प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। निर्णायकों को निर्णय देने में गहन विचार विमर्श करना पड़ा। डॉ पल्टा एवं कुलसचिव, डॉ सी.एल. देवांगन ने समस्त विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि अन्य प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को भी इस प्रकार की रचनात्मक स्पर्धाओं में हिस्सा लेना चाहिए। इससे छुपी हुई प्रतिभाएं सामने आती हैं।

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