गांव की मिट्टी-गांव का गोबर, प्रतिदिन 300-400 कमा रहीं महिलाएं

Gobar diya becomes good source of incomeभिलाई। गांव की मिट्टी-गांव का गोबर प्रतिदिन 300 से 400 रुपए का रोजगार दे सकती है, यह शायद किसी को सूझा ही नहीं होता यदि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह सुझाव नहीं दिया होता। आज महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रतिदिन अपने खाली समय में गोबर और मिट्टी को मिलाकर सुन्दर सजावटी दीये बना रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व अधिकारी कोमल मूर्ति एवं महिला उद्यमी शशि बंछोर इन महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं।ग्राम खपरी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला का आज अंतिम दिन था। शशि बंछोर ने बताया कि वैसे तो वे स्टेशनरी का निर्माण करती हैं पर जब गोबर-मिट्टी के उत्पादों की जानकारी मिली तो उन्होंने इसका भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने यू-ट्यूब से कुछ सीखा, नागपुर भी गईं और लौटने के बाद से महिलाओं को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठा लिया। अब तक उन्होंने लगभग 400 महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया है जिसमें से अनेक महिलाओं ने इसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरु कर दिया है।
श्री मूर्ति ने बताया कि महिलाओं तक पहुंचने के लिए स्व सहायता समूहों को माध्यम बनाया गया। खपरी और भटगांव की महिलाओं ने अब तक लगभग एक लाख दीये बनाए हैं। खुर्सीपार की महिलाओं ने दो लाख से अधिक गोबर-मिट्टी के दीये बनाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले नागपुर से गोबर-मिट्टी का पाउडर मंगवाया जाता था जिसे सांचे में डालकर दीये बनाए जाते थे। पर अब हम गांव के गोबर और मिट्टी का ही प्रयोग कर पाउडर स्वयं बना रहे हैं। इससे कच्ची सामग्री के मामले में हम आत्मनिर्भर हो गए हैं और लागत में भी काफी कमी आई है। दीयों को रंगरोगन कर सजाया जा रहा है। इसकी अच्छी कीमत मिल रही है। फिलहाल छह दीयों का पैकेट 35 रुपए में बेचा जा रहा है। त्यौहारी सीजन होने के कारण मांग बनी हुई है।
श्री मूर्ति ने बनाया कि गोबर-मिट्टी से बने उत्पाद काफी मजबूत होते हैं। दीया और भगवान की मूर्तियों के अलावा इससे सजावटी वस्तुएं भी बनाई जा सकती हैं जिसका बाजार साल भर रहता है। काम सीखने के बाद महिलाएं अपने स्तर पर भी इस क्षेत्र में प्रयोग कर सकती हैं।

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