डॉल्फिन म्यूजिकल ग्रुप ने दीपावली पूर्व संगीत संध्या में बांधा समा

Bollywood Nostalgic 90sभिलाई। डॉल्फिन म्यूजिकल ग्रुप ने दीपावली की अगुवाई में संगीत संध्या से समा बांध दिया। स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल के प्रायोजकत्व में आयोजित कोविड लॉकडाउन श्रृंखला की यह संभवतः अंतिम कड़ी थी। यह कार्यक्रम 90 के दशक के बॉलीवुड फिल्मी गीतों को समर्पित था। रविवार शाम आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के मशहूर साजिन्दों एवं गायकों ने अपनी प्रस्तुतियां ऑनलाइन देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रभंजय चतुर्वेदी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। उन्होंने गजलों की खूबसूरत प्रस्तुतियां भी दीं।कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ दीपक वर्मा ने कार्यक्रम का आरंभ करते हुए बताया कि 80 के दशक की मारधाड़ वाली फिल्मों के बाद 90 के दशक में एक बार फिर संगीत की मेलोडी लौट कर आई। उन्होंने प्रत्येक गीत के इतिहास से लोगों को परिचित करवाते हुए अनेक रोचक जानकारियां भी प्रदान की। नए संगीत निर्देशकों ने अपनी धुनों से तो लोगों को जोड़ा ही, सस्ते ऑडियो कैसेट्स ने बालीवुड संगीत को घर-घर पहुंचा दिया। इस दौर में ऐसे अनेक मधुर, कर्णप्रिय गीत बने जिन्हें लोग शायद कभी भुला नहीं पाएंगे। डॉलफिन म्यूजिकल ग्रुप इसी दौर के गीतों को प्रस्तुत कर रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत 1980 के दशक के अंतिम दिनों में यश चोपड़ा द्वारा बनाई गई फिल्म चांदनी के गीत ‘लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है’ को सत्या पाण्डेय एवं लता ने प्रस्तुत किया। इस फिल्म के लिए संगीतकार शिव-हिर को फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामीनेट किया गया था। 1991 में आई फिल्म ‘साजन’ का गीत ‘तुमसे मिलने की तमन्ना है’ को प्रस्तुत किया ओपी रजक ने। 1993 में ओसीडी पर आई फिल्म ‘डर’ के गीत ‘जादू तेरी नजर’ को प्रस्तुत किया राजदीप चक्रवर्ती ने। 1999 में बनी फिल्म ‘संघर्ष’ के गीत ‘मुझे रात दिन बस’ को प्रस्तुत किया डॉ रवि शुक्ला ने। 1990 में आई महेश भट्ट की फिल्म ‘आशिकी’ के गीत ‘बस इक सनम चाहिए’ को प्रस्तुत किया डॉ दीपक वर्मा ने। 1991 में आई फिल्म ‘100 डेज’ के गीत ‘सुन बेलिया, शुक्रिया मेहरबानी’ को प्रस्तुत किया सत्या पाण्डेय एवं लता ने। 1994 में आई फिल्म 1942 अ लव स्टोरी के गीत ‘कुछ न कहो, कुछ भी न करो’ को प्रस्तुत किया ओपी रजक ने। 1993 में आई फिल्म ‘खूबसूरत’ के गीत ‘बहुत खूबसूरत हो’ को स्वर दिया। राजदीप चक्रवर्ती ने। 1991 में आई फिल्म दिल है कि मानता नहीं के गीत ‘तू प्यार है किसी और का’ की खूबसूरत प्रस्तुति दी डॉ रवि एवं लता ने। 1988 में आई फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के गीत ‘ऐ मेरे हमसफर’ को प्रस्तुत किया स्पर्श के प्रबंध निदेशक डॉ दीपक वर्मा एवं लता ने। 1989 में आई फिल्म ‘मैने प्यार किया’ के गीत ‘मेरे रंग में रंगने वाली’ की खूबसूरत प्रस्तुति दी राजदीप चक्रवर्ती ने। 1992 में आई फिल्म ‘दीवाना’ के गीत ‘सोचेंगे तुम्हे प्यार’ को प्रस्तुत किया डॉ रवि शुक्ला ने।
कार्यक्रम के दौरान स्पर्श के मेडिकल डायरेक्टर एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एपी सावंत, डायरेक्टर डॉ संजय गोयल, स्पर्श के एमडी एवं अस्थि विशेषज्ञ डॉ दीपक वर्मा, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ दिलीप रत्नानी, पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट डॉ संदीप रामा थुटे, क्रिटिकल केयर फिजिशियन डॉ एस श्रीनाथ, न्यूरोसर्जन डॉ आदर्श त्रिवेदी, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ सुप्रिया गुप्ता, मेडिसिन कन्सल्टेंट डॉ जय तिवारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ कीर्ति कौरा, डॉ नम्रता भुसारी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील भुसारी, डॉ नवीन कौरा, डॉ आशीष जैन, डॉ ऋचा गुप्ता, डॉ पूनम वर्मा, प्लास्टिक सर्जन डॉ दीपक कोठारी, लैपरोस्कोपिक एवं जनरल सर्जन डॉ राहुल सिंह, सीए प्रदीप पाल एवं डॉयरेक्टर सीए अजय सोमानी ने गीतों के बीच लोगों को सुरक्षित दीपावली का संदेश एवं शुभकामनाएं दीं।
दीपंकर दास की संगीत निर्देशन में कीबोर्ड पर रतन बारिक, बास गिटार पर पंकज, लीड गिटार पर जोसफ, ऑक्टोपैड पर कबिन्द्र बर्मन, ढोलक पर हुपेन्द्र हिरवानी, ड्रम पर दीपंकर दास ने संगत की। कार्यक्रम का खूबसूरत संचालन डॉ दीपक वर्मा ने किया। साउण्ड मैनेजमेन्ट स्वर संगम दुर्ग का था। कार्यक्रम में चंद्रा नर्सिंग कालेज के मुकेश चंन्द्राकर का बड़ा सहयोग रहा। गेथन जॉर्ज, सूरज गुप्ता एवं मिर्जा समसूद ने कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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