सही स्तनपान से हो सकती है सालाना 8 लाख नवजातों की जीवनरक्षा : डॉ संगीता

Breast Feeding Dr Sangeeta Bhattacharjeeभिलाई। जन्म के बाद पहले घंटे में ही यदि नवजात को स्तनपान करा दिया जाए तो उसके निरोग होने एवं जीवित रहने की संभावना कई गुणा बढ़ जाती है। सही समय पर स्तनपान कराए जाने पर प्रतिवर्ष दुनिया भर में होने वाली 8 लाख नवजातों की मृत्यु को टाला जा सकता है। उक्त बातें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की डॉ संगीता भट्टाचार्या ने संडेकैम्पस से बातचीत के दौरान दी। भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विशेषज्ञ डॉ संगीता ने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फार्मूला फीड का चलन शुरू हुआ। जोरदार प्रचार प्रसार के कारण इसकी पहुंच घर-घर में हो गई। इसका विपरीत प्रभाव स्तनपान पर पड़ा जिसकी वजह से आज कई बीमारियां बच्चों को जकड़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं यूनीसेफ के अनुसार प्रत्येक पांच में से तीन बच्चों को जन्म के बाद के पहले घंटे में स्तनपान नहीं कराया जाता। विश्व की पांचवी सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था वाले भारत में स्तनपान में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया है। इसके कारण जच्चा-बच्चा दोनों कई प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह से सालाना 14 बिलियन डालर की आर्थिक क्षति हो रही है।
स्तनपान कौशल परामर्श की आवश्यकता : स्तनपान कराने में असुविधा, पीड़ा, पर्याप्त दूध न उतरना जैसी समस्याओं के निराकरण के लिए स्तनपान कौशल परामर्शदात्री का सहयोग जरूरी हो जाता है। वे माताओं को सही ढंग से स्तनपान कराने का प्रशिक्षण दे सकती हैं। इससे जच्चा बच्चा दोनों की स्वास्थ्य की निगरानी भी हो जाती है।
स्तनपान से माता को लाभ : स्तनपान कराने वाली माता को स्तन, अंडाशय एवं एंडोमीट्रियल कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। इससे गर्भाशय को उसकी पूर्व स्थिति में पहुंचाने में मदद मिलती है। प्रसाव पश्चात रक्तस्राव को रोकने में मदद मिलती है। स्तनपान कराने वाली माताओं में अवसाद की संभावना भी काफी कम हो जाती है। देखा गया है कि स्तनपान कराने वाली माताओं में ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थि क्षणभंगुरता) की समस्या भी काफी को हो जाती है।
स्तन पान कराने पर माता प्रतिदिन लगभग 500 कैलोरी खर्च करती है। इससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है। स्तनपान कराने पर बाजार में उपलब्ध बेबी फीड और बेबीफूड पर होने वाला खर्च बच जाता है। इससे मधुमेह का खतरा भी कम हो जाता है। स्तनपान कराना दो बच्चों के बीच अन्त को बढ़ाने में भी सहायक है।
स्तनपान से शिशु को होने वाले लाभ : जन्म के तुरन्त बाद से लेकर छह माह की उम्र तक केवल स्तनपान करने वाले बच्चे श्वांस नली के संक्रमण, जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टिनल) संक्रमण, अतिसार (डायरिया), उलटियां, चाइल्डहुड लिम्फोमा, विभिन्न प्रकार की एलर्जी, आदि से सुरक्षित रहते हैं। स्तनपान शिशु की आंखों के पूर्ण विकास में सहयोग करता है। मां का दूध शिशु के प्राकृतिक रूप उपलब्ध कराया गया सम्पूर्ण आहार है। इसका तापमान शिशु के सर्वथा अनुकूल होता है। यह माता एवं शिशु के बीच एक मजबूत भावनात्मक एवं शारीरिक रिश्ता कायम करता है। शिशु की आकस्मिक मृत्यु के खतरे को भी यह एक तिहाई तक कम कर देता है। यह शिशु को भविष्य में टाइप-1 एवं टाइप-2 डायबिटीज से सुरक्षित रखता है। स्तनपान करने वाले शिशु अन्य शिशुओं की तुलना में जल्दी बोलना, चलना सीखते हैं। इससे बच्चे की बुद्धि तीक्ष्ण होती है तथा वह हर क्षेत्र में बेहतर करता है। यह शिशु की आवश्यकता के अनुसार हर समय उपलब्ध रहता है और इसपर कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होता।
कोविड-19 में स्तनपान : स्तनपान से जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य को लाभ होता है। स्तनपान के द्वारा कोविड संक्रमण के आगे बढ़ने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
यदि माता कोविड पॉजीटिव है तो उसे नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना चाहिए तथा शिशु को छूने से पहले हाथों को अवश्य धोना चाहिए या अल्कोहल वाले सैनेटाइजर से सैनेटाइज करना चाहिए। स्तनपान कराते समय मेडिकल मास्क का उपयोग करना चाहिए। जैसे ही मास्क मे नमी आती है, उसे बदल देना चाहिए। मेडिकल मास्क को दोबारा उपयोग में नहीं लाना चाहिए। उपयोग के बाद मास्क की बाहरी सतह को नहीं छूना चाहिए। छींक या खांसी आने पर टिशु का उपयोग करना चाहिए तथा टिशु को तुरंत ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंक देना चाहिए।

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