Women must set limits to suffering - Singhai

महिलाओं को तय करनी होगी अपनी सहनशक्ति की सीमा – शर्मिला सिंघई

दुर्ग। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ट एवं विशाखा समिति के संयुक्त तत्वावधान में महिलाओं के कानूनी अधिकार विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। व्याख्यान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पदस्थ राशुल भावनानी ने अपने व्याख्यान में कहा कि जब तक महिलायें अपने-अपने अधिकारों के प्रति सचेत नहीं होगीं तब तक वे सशक्त नहीं होगी। निडर और सशक्त होने के लिये उन्हें अपनी शक्ति के साथ-साथ अपने अधिकारों को जानना जरूरी हे। उन्होंने घरेलू हिंसा कानून, कार्यस्थल पर समानता का व्यवहार तथा कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ कानून, कन्या भ्रूण हत्या कानून तथा महिला निजिता सुरक्षा कानून की विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में मुख्य वक्ता शर्मिला सिंघई ने महिलाओं के कानूनी अधिकार विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि जब तक महिलायें भीतर से, मन से सशक्त नहीं होंगी, तब तक उनका सही मायने में सशक्तिकरण संभव नही है। उनको अपनी सहनशक्ति की सीमा तय करनी होगी तथा खुद अपने सपनों और अधिकारों के लिये लड़ना सीखना होगा।
सुश्री सिंघई ने व्याख्यान के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी में छात्रों एवं महिला प्राध्यापकों की शंकाओं का समाधान किया। एफआईआर कैसे दर्ज होती है, ब्लैक मेलिंग से कैसे बचे तथा कैसे ब्लैक मेलिंग का सामना करें, कार्यस्थल पर महिलाओं के कौन-कौन से मूलभूत अधिकार है – जैसे प्रश्नों के उत्तर देते हुये उन्होंने बच्चियों के मनोबल को बढ़ाते हुये उनकी निडर परवरिश पर जोर दिया। महिलाओं के मूलभूत अधिकारों पर जोर दिया। महिलाओं के मूलभूत अधिकारों पर चर्चा करते हुये सुश्री भावनानी ने लीगल ऐड सेल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर आर्थिक स्थिति की महिला के लिये मुफ्त कानूनी सलाह का प्रावधान है।
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ सोमाली गुप्ता ने किया। मुख्य वक्ता का परिचय डॉ सुचित्रा गुप्ता द्वारा दिया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ रंजना श्रीवास्तव ने दिया। डॉ बलजीत कौर, डॉ शिखा अग्रवाल, डॉ कमर तलत ने इस कार्यक्रम के आयोजन में विशेष योगदान दिया।

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