SSSSMV students suggest ways to stay happy

स्वरूपानंद कालेज में विश्व हास्य दिवस पर तनावमुक्ति का फार्मूला

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद महाविद्यालय में विश्व हास्य दिवस अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जिसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न विधाओं के द्वारा यह संदेश दिया कि किस तरह आज की व्यस्त तथा तनाव मुक्त जीवन में हम तनाव मुक्त हो सकते हैं तथा अपने आसपास के वातावरण को तनावमुक्त रख सकते हैं।महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कि हंसने से तनाव दूर होता। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं बल्कि दूसरों को भी आनंदित करते हैं वर्तमान परिपेक्ष्य में जहां पूरा संसार नकारात्मकता से ग्रसित हो रहा है वही प्रसन्नता और हंसी ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती हैं।
महाविद्यालय के मुख्यकार्यकारी डा. दीपक षर्मा ने कहा जब हम हंसते हैं तो तनाव से मुक्त हो जाते हैं। आज तनाव भरी जिंदगी में राहत के लिए लाफिंग क्लब गठित किये गये है। लाफिंग योगा कराया जाता है।
कार्यक्रम संयोजक संयुक्ता पाढी सहायक प्राध्यापक अंग्रेजी हास्य दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हास्य सार्वभौमिक भाषा है। व्यक्ति के चेहरे पर प्रसन्नता ही उसके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को नापने का पैमाना है। महाविद्यालय में इस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में हंसने के फायदे के बारे में जागरूक करना और संसार में खुशियां फैलाना है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। प्रणव साहू बीबीए प्रथम सेमेस्टर ने बताया कि प्रसन्न रहने के लिए भौतिक सुखों की नहीं बल्कि आत्मिक सुख की आवश्यकता है। सृष्टि तिवारी बीबीए प्रथम सेमेस्टर ने बताया कि सकारात्मक रहकर ही प्रसन्न रहा जा सकता है। नीरज यादव बीबीए प्रथम सेमेस्टर ने तनाव मुक्त रहने के लिए पेंटिंग को अपना माध्यम बनाया हैं। पारिजात श्रीवास्तव बीएससी द्वितीय सेमेस्टर नृत्य को तनाव मुक्त होने का माध्यम बनाया है। फरान बीसीए प्रथम सेमेस्टर ने निबंध के द्वारा प्रसन्नचित जीवन के महत्व को बताया।
ईशा अल्टी बीकॉम अंतिम, पृथ्वी सिंह राजपूत बीए प्रथम वर्ष, अल्फीजा खान बीकॉम प्रथम, प्रीति कुमारी बीकॉम प्रथम, किरण चतुर्वेदी एम एड प्रथम सेमेस्टर के व्याख्यान और सुंदर कविताओं ने सभी को हंसा दिया। सृष्टि तिवारी बीसीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि खुश रहना हमारी सोच पर निर्भर करता है। खुश होने का संबंध भौतिक सुख सुविधाओं से नहीं बल्कि मानसिक अवस्था से होता है।
विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में उत्साह के साथ भागीदारी दी और खुश रहने का संदेश दिया।

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