Soil testing workshop held at SSSSMV

स्वरूपानंद महाविद्यालय में 15 दिवसीय मृदा परीक्षण कार्यशाला का आयोजन

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महाविद्यालय में 15 दिवसीय मृदा परीक्षण कार्यशाला का आयोजन माइक्रोबॉयोजलाजी विभाग द्वारा किया गया। कार्यशाला संयोजिका डॉ. शमा ए. बेग ने बताया कि स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में पर्यावरण अध्ययन विषय के अंर्तगत विद्यार्थी जल, वायु, मिट्टी आदि के प्रदूषण के कारण का अध्ययन करते है। इसके तहत छात्रों को मृदा के स्वरूप के बारे में सैध्दांतिक जानकारी दी जाती है। विद्यार्थी मृदा के प्रायोगिक परीक्षण कर प्रदूषण के कारक को समझ पाये तथा प्रदूषण कम करने के कारकों को जाने इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए मृदा परीक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पृथ्वी की सबसे उपरी सतह को मृदा कहते है जिसका निर्माण चट्टानों के विघटन और कार्बनिक पदार्थो के फलस्वरूप होता है इसमे अधिकांश वनस्पतियॉं, जंतु एवं सूक्ष्मजीव निवासरत है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि पर्यावरण अध्ययन के तहत यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है इस कार्यशाला से विद्यार्थी अपने आस-पास के क्षेत्रों में पाये जाने वाली मिट्टी और उसकी विशेषताओं को समझ पायेंगे तथा पर्यावरण में मिट्टी के महत्व को व्यावहारिक रूप से समझने का मौका मिलेगा।
महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ दीपक शर्मा ने कहा कि इस तरह के कार्यशाला के आयोजन से विषय का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है और विद्यार्थी विषय के महत्व को समझते है।
कार्यशाला में छात्रों को अलग-अलग 15 समूह में बॉंटा गया फिर उन्हे मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि बताई गयी जैसे- मिट्टी 1.5 ईंच से 2.00 ईंच की गहराई से लेनी चाहिये, उसे परीक्षण ट्यूब या डिब्बे में लेबल लगाकर रखना चाहिये लेबल मे नमूने का नाम, मृदा स्त्रोत की जानकारी, दिनॉंक, मौसम इत्यादि का विवरण होना चाहिए। मिट्टी के सैम्पल को कपड़े की थैली में रखना चाहिए। मिट्टी एकत्रित करने के बाद मिट्टी का रासायनिक परीक्षण बताया गया जैसे- अम्लता/क्षारीयता, नाइट्रोजन, क्लोरीन, पोटाश की मात्रा ज्ञात करना जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति की जानकारी प्राप्त हो। तदोपरांत मिट्टी की सूक्ष्मजीवीय विषलेशण के तरीकों से अवगत कराया गया जिससे विद्यार्थियों को मिट्टी मे सूक्ष्मजीवों की संख्या, कार्य एवं उनसे होने वाले रोगों की जानकारी प्राप्त हो। मिट्टी में पाये जाने वाले अधिकांश सूक्ष्मजीव लाभदायक एवं हानिकारक होते है उनका विस्तार से विवरण विद्यार्थियों को बताया गया।
छात्रों ने विभिन्न स्थान जैसे- मरोदा सेक्टर, रिसाली, उतई, पाटन, कोहका, कातुलबोड, हरिनगर, पद्मनाभपुर, सेक्टर-5,6,7,8,9, हुडको, कादम्बरी नगर, मालवीय नगर, आर्दष नगर, बोरसी इत्यादि की मिट्टी का सैंपल लिया और पाया कि उनमें से अधिकतम स्थान की मिट्टी का pH 5.3-6 के मध्य है, नाइट्रोजन एवं कैल्शियम की मात्रा 0.08-1.8mol/kg है, और पोटाश की मात्रा 0.08-0.20 mol/kg पायी गयी। मिट्टी में उपलब्ध यह खनिज तत्व उसके उर्वरक क्षमता का निर्धारण करते है।
15 स्थलों के सूक्ष्मजीवीय परीक्षण में 26 फंगल प्रजाति और 31 बेक्टीरियल प्रजाति पाये गये। विद्यार्थियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मिट्टी का सैम्पल कैसे लेना है, उसे कैसे रखना है तथा लैब में उसके परीक्षण से हम विषय के व्यावहारिक पहलू से रूबरू हुए तथा क्षेत्र विशेष के अनुसार मिट्टी के प्रकार एवं उसमें पाये जाने वाले प्रजाति के लाभकारक एवं हानिकारक तत्वों को जानना हमारे लिए रोमांचक रहा।
कार्यशाला आयोजन में सहायक प्राध्यापिका डॉ. निहारिका देवांगन, श्रीमती उषा साहू, श्रीमती हेमपुष्पा उर्वशा एवं सुश्री राखी अरोरा का विशेष योगदान रहा।

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