Catch the Rain and Save water

स्वरूपानंद महाविद्यालय में विश्व जल दिवस पर परिचर्चा

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महाविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग एवं आइक्यूएसी सेल के संयुक्त तत्वावधान में विश्व जल दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के लिए स्लोगन तथा परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि जल है तो कल है। हमें घर एवं सार्वजनिक स्थल पर पानी के अपव्यय को रोकना होगा। जल प्रदूषण को कम करना होगा ताकि आने वाली पीढ़ी को पीने के लिए शुध्द जल मिल सकें। राज्य सरकार की नरवा योजना से जल के अपव्यय को रोका जा सकता है।महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने आयोजन के लिए समस्त महाविद्यालय के स्टाफ एवं छात्रों को बधाई दी। डॉ. शर्मा ने जल को संरक्षित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी और सभी को इसमें सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि जल की हर बूंद अनमोल है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ शमा ए.बेग ने बताया कि धरती का तीन चौथाई हिस्सा पानी है परंतु इसका केवल 3% पानी ही पीने योग्य है। जल ही जीवन है। विश्व जल दिवस का इतिहास बताते हुए उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर 1972 को संयुक्त राष्ट्र असेंबली में इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित हुआ और 22 मार्च 1993 से इसकी सफल शुरुआत हुई। पानी की अहमियत उसकी कीमत से कहीं ज्यादा है इसे बचाने के लिए आने का अभियान चलाया जाते हैं पर इसमें पूरी तरह कामयाबी नहीं मिली हैं। दुनिया में 10 में से 2 व्यक्ति को पीने का साफ पानी नहीं मिलता। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसके लिए एक सार्थक पहल की है जल शक्ति अभियान “catch the rain”की शुरुआत करके अर्थात बारिश के पानी को इकट्ठा करना है जहां भी जब भी वह गिरे।
डॉ. पूनम निकुंभ सहायक प्राध्यापक शिक्षा ने बताया कि हम आदतों को सुधारकर जैसे- ब्रश करते समय नल को खुला न रखे, गाड़ियों को धोने के बजाय सूखे कपड़े से पोछे, सब्जी व चावल धोने वाले पानी को हम बगीचे में या पौधो में डाल सकते है।
डॉ. शैलजा पवार सहायक प्राध्यापक शिक्षा ने बताया कि हम कैसे हमारे घर में छोटी-छोटी अपनी आदतों को बदलकर कैसे पानी को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए बचा सकते हैं।
डॉ. पूनम शुक्ला सहायक प्राध्यापक शिक्षा ने कहा कि पानी की कीमत हमारे वक्त से भी ज्यादा है पानी की अहमियत बस एक दिन पानी बचाने से नहीं होगा बल्कि रोज हमें पानी को बचाना और आने वाले त्यौहार होली में कम से कम पानी की खपत करने का संकल्प करें। श्रीमती सुनीता शर्मा सहायक प्राध्यापक जूलाजी ने कहा कि पानी और हवा के बिना जीवन नहीं है। हमें पानी के प्रत्येक बूंद के महत्व को समझकर जागरूकता से पानी को बचाना होगा। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में सोक्ता बनाकर गंदे पानी साफ कर उसे पुनः उपयोग योग्य बनाया जा सकता है। श्रीमती मंजू कनौजिया सहायक प्राध्यापक शिक्षा ने कहा कि पानी के मूल्य को समझना आज हमारे लिए अनिवार्य है आने वाली पीढ़ी के लिए हमें पानी को बचाना है।
डॉ. सुनीता वर्मा सहायक प्राध्यापक हिन्दी ने कहा कि जल ही जीवन है। जीवन के साथ पानी प्रकृति के लिए भी अनिवार्य है। जलए हवा और आग सब पूजनीय हैं।
सुश्री शिरीन अनवर सहायक प्राध्यापक बायोटेक्नोलॉजी ने कहा कि आज हमें कोई बहुत बड़े कदम उठाने की आवश्यकता नहीं बल्कि छोटे छोटे प्रयासों से पानी को बचा सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को जल संकट का सामना ना करना पड़ें।
सुश्री राखी अरोरा सहायक प्राध्यापक माइक्रोबायोलॉजी ने कहा कि हमें पानी संरक्षण के साथ पेड़ पौधे ज्यादा से ज्यादा लगाकर पानी को इवेपोरेट होने से रोकना होगा जिससे प्रकृति में नमी बनी रहेगी और मिट्टी की फर्टिलिटी बनी रहेगी।
बीएड प्रथम सेमेस्टर के छात्र गुरदीप गरछा ने कहा की हमें अपने आप में एक दृढ़ निश्चय लेना होगा कि हम हर रोज पानी को बचाएंगे और सरकार के नियमों को ध्यान में रखते हुए हर नवनिर्मित घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्यतः बनवाये।
बी एड प्रथम सेमेस्टर के छात्र दिलीप कुमार ने कहा कि पानी को बचाने के साथ.साथ पेड़ पौधे लगाकर जल स्त्रोत बढ़ा सकते है जिससे जल स्तर निम्न नही होगा।
बी एड प्रथम सेमेस्टर के छात्र ऋषभ सिन्हा ने कहा कि विश्व जल दिवस के अवसर पर जल को हर प्रकार से संरक्षित करें। आज जरूरत है नए तकनीकों को अपनाकर जिसमें कम जल का उपयोग करके खेती करें।
सुश्री पूजा सोढ़ा सहायक प्राध्यापक वाणिज्य विभाग ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में सबको धन्यवाद करते हुए कहा कि आस.पास सब को जागरूक करके पानी को संरक्षित करें।
मंदिर, मस्जिद, गिरिजा, गुरुद्वारे में बसता है|
यह पानी हम सब पर रहमत करता है,
आओ सब मिलकर इसे सहेजें और संरक्षित करें।।
परिचर्चा में विभिन्न विभागो के प्राध्यापक व छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

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