FIR against hooliganism in Hitek Hospital

हाइटेक में हंगामा करने वालों के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत एफआईआर

भिलाई। हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में हंगामा एवं तोड़फोड़ करने वाले फारूख एवं साथियों के खिलाफ सुपेला पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता), 427 (नुकसान पहुंचाने की नियत से किया गया कृत्य), 34 (आपराधिक कृत्य) के अलावा महामारी अधिनियम की धारा 3 (डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक स्टॉफ समेत सभी स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज किया गया है। इस धारा के अनुसार महामारी संबंधी नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ दाण्डिक कार्रवाई का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि कोरोना के पुष्ट मामले में मृत्यु की सूचना आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दी जाती है। शव परिजनों को नहीं सौंपा जाता। शव प्राप्त करने के लिए परिजनों ने बड़ी संख्या में आकर अस्पताल परिसर में हंगामा किया था। शव दूसरे दिन पुलिस की उपस्थिति में परिजनों को सौंपा गया था। यह पूरा हंगमा अस्पताल के सीसीटीवी में कैद है जिसके फुटेज पुलिस को उपलब्ध करा दिये गये हैं।
हाइटेक के डायरेक्टर मनोज अग्रवाल ने कहा कि सभी अस्पताल भारी दबाव के बीच कोरोना मरीजों की सेवा कर रहे हैं। किसी की मौत पर लोगों का भावुक हो जाना भी समझ में आता है पर इसे लेकर अस्पताल में हंगामा करना, तोड़फोड़ करना, मेडिकल टीम को धमकाना कहीं से भी उचित नहीं है। शासन ने हमारी सुरक्षा के लिए जो नियम बनाए हैं, हम बस उसी के तहत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अस्पताल की कोरोना टीम के प्रभारी डॉ प्रतीक कौशिक ने कहा कि बार-बार इस तरह की घटनाओं को लेकर चिकित्सकों तथा स्टाफ में भय व्याप्त है। ऐसी घटनाओँ को रोकने के लिए महामारी अधिनियम (संशोधित) 2020 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। नर्सिंग अधीक्षक स्मिता ने कहा कि अपनी जान को जोखिम में डालकर 24 घंटे कोरोना मरीजों की सेवा में लगी नर्सों का मनोबल गिरा है और वे काम पर आने में हिचकिचाने लगी हैं। संकट की इस घड़ी में इस तरह की घटनाएं मुसीबत को और बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि आईएमए ने अक्टूबर 2020 में जिलाधीश को एक ज्ञापन सौंपकर संशोधित अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की मांग की थी।

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