DSCET celebrates Earth Day

पृथ्वी को सबसे ज्यादा नुकसान मानव ने पहुंचाया – डॉ सावंत

खपरी (दुर्ग)। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल दुर्ग की क्षेत्रीय अधिकारी डॉ अनिता सावंत का मानना है कि 19वीं सदी से लेकर अब तक मानव ने ही पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरणीय समस्याएं, स्वास्थ्य समस्याएं, ऑक्सीजन की कमी, बाढ, भूस्खलन तथा सभ्यता एवं संस्कृति के ह्रास जैसी समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं। डॉ सावंत देव संस्कृति कालेज ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी में पृथ्वी दिवस पर आयोजित वेबीनार को मुख्य वक्ता की आसंदी से संबोधित कर रही थीं।डॉ सावंत ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हों, वृक्षारोपण करे, जैवविविधता का संरक्षण करे, वन्य जीवों का संरक्षण करे, विलुप्त प्रजातियो को पुनः स्थापित करें। जैविक कृषि को बढ़ावा दें, रासायनिक खादों का उपयोग कम करें, गंदे पानी के पुनर्चक्रण के उपाय करें। तभी भूमिगत जल सुरक्षित रहेगा और पृथ्वी का तापमान बना रहेगा। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा नहीं किया त प्रकृति अपनी सुरक्षा स्वयं करना जानती है। वह हमें ऐसा सबक सिखाएगी कि हम याद रखेंगे।
मुख्य अतिथि की आसंदी से वेदमाता गायत्री शिक्षण समिति के अध्यक्ष वासुदेव प्रसाद शर्मा ने सभी को पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी प्रकृति के अंग हैं। अगर हम असंतुलन पैदा करेंगे तो प्रकृति इसे ठीक करने के लिए हमारा नामो निशान मिटा देगी।
महाविद्यालय की डायरेक्टर ज्योति शर्मा ने महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों का परिचय देते हुए कहा कि महाविद्यालय की स्थापना 2007 में की गई। इसका उद्देश्य मनुष्य को मानव से महामानव एवं श्रेष्ठतम नागरिक तैयार करना है। महाविद्यालय शासन की विभिन्न योजनाओं जैसे जागरूकता रैली, स्वच्छता अभियान, पालिथिन मुक्त भारत, कोविड.19 जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी देता है। उन्होंने वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का आग्रह किया, ताकि धरती का संतुलन बना रहे।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्राचार्य डॉ कुबेर सिंह गुरूपंच ने कहा कि पर्यावरण तथा समाज एक दूसरे पर निर्भर है। वर्तमान में पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ रही है जिसके कारण पृथ्वी का बोझ बढ़ गया है। पर्यावरण अवनयन, वन विनाश, प्रदूषण, परिस्थितिकीय असंतुलन तथा प्राकृतिक संसाधनो की रिक्तिता से समस्याए पैदा हो रही है अतः इससे बचने के लिए जागरूकता आवश्यक है।
आभार प्रदर्शन करते हुए ममता दुबे ने कहा कि पेड़ लगाओगे हरा-भरा तभी सुरक्षित बचेगी वसुन्धरा। इस कार्यक्रम में जयहिंद कछौरिया (तकनीकी प्रमुख), योगेष साहू (तकनीकी सहयोगी), धनेष कुमार एवं समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ ने भूमिका निभाई। 100 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुए।

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