Children's Book Day

समृद्ध रही है बाल साहित्य की परम्परा, कठिन है रचना

भिलाई। 2 अप्रैल को आज पूरा विश्व बाल साहित्य दिवस मना रहा है। बाल-साहित्य् लेखन की परंपरा अत्यं2त प्राचीन है। नारायण पंडित ने पंचतंत्र नामक पुस्ताक में कहानियों में पशु-पक्षियों को माध्यतम बनाकर बच्चों को शिक्षा प्रदान की। कहानियों को सुनना तो बच्चों की सबसे प्या-री आदत है। कहानियों के माध्यबम से ही हम बच्चोंप को शिक्षा प्रदान करते हैं। बचपन में हमारी दादी, नानी हमारी मां ही हमें कहानियां सुनाती थी। कहानियॉं सुनाते-सुनाते कभी तो वे हमें परियों के देश ले जाती थी तो कभी सत्यम जैसी यथार्थवादी वाली बातें सिखा जाती थीं। साहस, बलिदान, त्याेग और परिश्रम ऐसे गुण हैं जिनके आधार पर एक व्य क्ति आगे बढ़ता है और ये सब गुण हमें अपनी मां के हाथों ही प्राप्तक होते हैं। बच्चेण का अधिक से अधिक समय तो मां के साथ गुजरता है मां ही उसे साहित्यी तथा शिक्षा संबंधी जानकारी देती है क्योंोकि जो हाथ पालना में बच्चेा को झुलाते हैं वे ही उसे सारी दुनिया की जानकारी देते हैं।
श्री के. शंकर पिल्ल ई द्वारा बाल साहित्या के संदर्भ में “चिल्ड्रे न बुक ट्रस्ट‍” की स्था्पना १९५७ में की गई थी। आज यह ट्रस्टक अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस ट्रस्टत का मुख्यज उद्देश्य् बच्चों के लिए उचित डिजाइनिंग व सामग्री उपलब्धब कराना है। इसमें 5-16 वर्ष तक के बच्चोंय के लिए बेहतर बाल साहित्य उपलब्ध है।
चिल्ड्रतन बुक ट्रस्टग ने बच्चोंै के लिए असमिया, बंगाली, हिन्दी , गुजराती, कन्न ड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलगू भाषाओं में सचित्र पुस्तेकें प्रकाशित की हैं। इस ट्रस्ट् के परिसर में ही डा0 राय मेमोरी चिल्ड्रभन वाचनालय तथा पुस्त कालय की स्थाहपना की गई है। जो केवल 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए हैं। इसमें हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा की 30,000 से अधिक पुस्तवकें हैं। इसी क्रम में सन् 1991 में शंकर आर्ट अकादमी की स्थांपना की गई है। जहॉं पर पुस्त क, चित्र, आर्ट तथा ग्राफिक के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। शंकर इंटरनेशनल चित्रकला प्रतियोगिता भी पूरे देश में आयोजित की जाती है‍ जिससे बच्चों में सृजनात्म क रुचि का विकास होता है।
आधुनिक बालसाहित्य के प्रणेता के रूप में डॉ हरिकृष्ण देवसरे ने 300 से अधिक पुस्तकें लिखी, साहित्य के प्रतिष्ठित संस्थाओं से 25 से अधिक राष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। साहित्य अकादेमी द्वारा बालसाहित्य के क्षेत्र में समग्र योगदान हेतु वर्ष 2011 के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

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