Wild cattle may destroy forest cover

भविष्य के लिए खतरा हैं जंगली गायों के झुण्ड : डॉ नायक

भिलाई। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ एम एल नायक का मानना है कि देश भर में तेजी से बढ़ रही जंगली गायों की संख्या भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं। इन मवेशियों को संध्याकाल में लगभग प्रत्येक गांव के बाहर पेड़ों के नीचे देखा जा सकता है। 2019 में आई रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में ऐसे आवारा पशुओं की संख्या इस समय 50 लाख से अधिक है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। शहरों में ये यातायात दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। गांवों में ये खेतों और जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।डॉ नायक 7-10 मार्च तक डीएवी हुडको के सभागार में भारत सरकार के विज्ञान प्रसार एवं साइंस सेन्टर ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रकृति अध्ययन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि काम के सिलसिले में विभन्न जिलों का दौरा करते समय उन्होंने देखा कि प्रत्येक गांव के बाहर पशुओं के झुंड विश्राम कर रहे हैं। पूछने पर पता चला कि ये मवेशी किसी के नहीं हैं। इनती बड़ी संख्या में पशुओं का जंगलों पर आश्रित हो जाना प्राकृतिक संतुलन के लिए खतरा है। उन्होंने इसका जिक्र तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से भी किया था।
समस्या : आवारा गायों के झुण्ड यातायात के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। ये न केवल स्वयं सड़क हादसों का शिकार होती हैं बल्कि स्वयं भी शिकार होती हैं। मनुष्यों से सम्पर्क क्षीण होने पर ये आक्रामक हो जाती हैं। भोजन की व्यवस्था नहीं होने के कारण ये खेतों और जंगलों को नुकसान पहुंचाती हैं। मूलतः जंगलों पर आश्रित होने के कारण इन्हें जंगली गाय की संज्ञा दी जाती है।
सत्र को दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर नारायण पुरुषोत्तम दक्षिणकर, भारत सरकार के विज्ञान प्रसार (नई दिल्ली) के निदेशक डॉ बी के त्यागी, साइंस सैंटर की सचिव संध्या वर्मा, संयोजक डॉ डी एन शर्मा ने भी संबोधित किया। चार दिवसीय कार्यशाला में कवर्धा, राजनादगांव , बालोद, बेमेतरा एवं दुर्ग जिले के 55 शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
छत्तीसगढ़ में उपाय : छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े पैमाने पर गौठानों का संचालन प्रारंभ किया है। साथ ही गोबर और गौमूत्र के व्यावसायिक उपयोग को प्रोत्साहित करना प्रारंभ किया है। गोबर के कंडों का उपयोग बड़े पैमाने पर शवदाह के लिए किया जाने लगा है। गोबर और मिट्टी को मिलाकर सजावटी एवं गृहोपयोगी वस्तुओं का निर्माण प्रारंभ हुआ है। बावजूद इसके अब भी बड़ी संख्या में आवारा मवेशियों को गांवों के आसपास भटकते देखा जा सकता है।
उत्तरप्रदेश में प्रयास : सरकारी गौशालाओं से मोहभंग होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना को मंजूरी दी है। योजना के पहले चरण के तहत योगी सरकार द्वारा संचालित गोशालाओं में से एक लाख से अधिक मवेशियों को इच्छुक किसानों या अन्य लोगों को उचित प्रक्रिया के बाद उनकी देखभाल के लिए सौंपा जाएगा। इन गायों की देखभाल के लिए 30 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच जाएगी। योजना पर पहले चरण मं 109 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है।

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