Category Archives: Literature

Short Story : जन्मदिन का तोहफा

निधि सिन्हा की कलम से

sketch Asha Sudhakar

निधि सिन्हा की कलम से
ट्रिन… ट्रिन…
‘सवेरे सवेरे किसका फोन आ गया?’
‘हैल्लो …’
‘नमस्ते बहनजी, मैं शुभी की मम्मी बोल रही हूं। आज शुभी का जन्मदिन है। मैं सोच रही थी सब एकसाथ मिलकर मनाएं।’
‘ऐसा है बहन जी! हमारे यहाँ न मनाते बहुओं का जन्मदिन। और मैं तो कतई न करने की नई रीत।’ कहकर शुभी की सास ने बिना उत्तर की प्रतीक्षा किये फोन काट दिया, और बड़बड़ाती हुई अपने कमरे में चली गई।
शुभी भी नम आंखों से ठंडी हो चुकी चाय को गरम करने रसोई की तरफ चल दी।
‘पता नहीं क्या चिढ़ है इन्हें मुझसे। हर समय सुनाती रहती हैं। कुछ भी कर लूं कभी खुश ही नही होतीं।’ दुखी होकर शुभी पति से बोली…

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इसी पहाड़ी पर मिला था गणेश को एकदंत का नाम

इसी पहाड़ी पर मिला था गणेश को एकदंत का नाम दंतेवाड़ा। गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता के दर्शन के लिए लोग ढोलकल पहाड़ी पर भी चढ़े। रायपुर और प्रदेश के अन्य हिस्से से पहुंचे पर्यटकों का दल समुद्र तल से 2994 फीट ऊंची चोटी पर पहुंचा। यहीं श्रीगणेश और परशुराम का युद्ध हुआ था जिसमें एक दांत टूट जाने से गणेशजी को एकदंत कहा गया और जहां परशुराम का फरसा गिरा था वह गांव फरसपाल के नाम से प्रसिद्ध हुआ।दंतेवाड़ा। गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता के दर्शन के लिए लोग ढोलकल पहाड़ी पर भी चढ़े। रायपुर और प्रदेश के अन्य हिस्से से पहुंचे पर्यटकों का दल समुद्र तल से 2994 फीट ऊंची चोटी पर पहुंचा। यहीं श्रीगणेश और परशुराम का युद्ध हुआ था जिसमें एक दांत टूट जाने से गणेशजी को एकदंत कहा गया और जहां परशुराम का फरसा गिरा था वह गांव फरसपाल के नाम से प्रसिद्ध हुआ। भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है। इसमें एक नाम एकदंत इसी ढोलकल पहाड़ी पर मिला।

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My Daughter Will Not…

My Daughter Wont...  Her daughter's eyes reflected her own dreams. She smiled and said what if she can't be a queen, she can raise one.  ByCovered in veil, she walked five
Kilometres to fetch water,
And sat there thinking about the
Future of her daughter,
Deprived of education at the age of fifteen,
Her dreams shattered of being a queen,

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I Will Fight Back – Anamika

I will fight BackI raised my head to see the groom My father had bought me for 20 lakhs His mother demanded gold jwerlleries  His father a car looking at their son , I wondered  They gifted me a lifetime scar.I raised my head to see the groom
My father had bought me for 20 lakhs
His mother demanded gold jewelleries
His father a car
looking at their son , I wondered
They gifted me a lifetime scar.
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इस दिव्यांग ने अकेले पहाड़ चीरकर बनाया रास्ता

इस दिव्यांग ने अकेले पहाड़ चीरकर बनाया रास्ता तिरुअनंंतपुरम। दिव्यांग मेलेथुवेट्टील ससी ने तीन साल तक प्रतिदिन 6-6 घंटे की कड़ी मेहनत कर पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया। ससी को लकवा मार गया था और वह ठीक से चल भी नहीं पाता पर इरादे फौलाद से ज्यादा मजबूत थे।तिरुअनंंतपुरम। दिव्यांग मेलेथुवेट्टील ससी ने तीन साल तक प्रतिदिन 6-6 घंटे की कड़ी मेहनत कर पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया। ससी को लकवा मार गया था और वह ठीक से चल भी नहीं पाता पर इरादे फौलाद से ज्यादा मजबूत थे। ससी ठीक से चल नहीं सकता, ज्यादा देर खड़ा नहीं रह सकता, चीजों को ठीक तरह से पकड़ भी नहीं पाता। पर अपने दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास और अविश्वसनीय धैर्य ने ससी ने ऐसी मिसाल पेश की कि आज हर कोई उसके बारे में जानने को उत्सुक है। ससी अपने घर के सामने स्थित एक पहाड़ को चीरकर रास्ता बना दिया।

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हिन्दी को समझना और समझाना आसान -भट्टाचार्य

FSNLभिलाई। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक राजीब भट्टाचार्य के मुख्य आतिथ्य एवं उप महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) केएल पटेल की अध्यक्षता में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति भिलाई-दुर्ग स्तरीय तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता हुई। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति भिलाई-दुर्ग के 52 सदस्य संस्थानों के प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि राजीब भट्टाचार्य ने कहा कि भाषा संवाद अदायगी का सशक्त माध्यम है और हिंदी की खासियत है कि इसमें समझना और समझाना दोनों आसान है।

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दीपक चन्द्राकर के अवदान को सराहा

व्यक्तित्व व कृतित्व पर केन्द्रित पुस्तिका विमोचित
Lokrang Arjundaभिलाई। ‘लोकरंग अरजुन्दा’ के संस्थापक-संचालक दीपक चन्द्राकर पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन एक सादे समारोह में हुआ। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व के विविध पहलुओं के साथ कृतित्व पर चर्चा करते हुए लोककला जगत में उनके अवदान की सराहना की। सभी ने माना कि दीपक चन्द्राकर ने लोकमंच की दुनिया को अत्यंत निष्ठा और समर्पण के साथ समृद्ध किया है। इस अवसर पर देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘सापेक्ष’ के संपादक महावीर अग्रवाल ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि मैं यहां दीपक भाई के काम को सलाम करने आया हँू। उन्होंने लोकरंग को नई ऊंचाइयां दी। दीपक जी को उनका ‘गम्मतिहाÓअमर कर सकता है। वे अगर लोकरंग के संचालक नहीं होते तब भी एक बड़े कलाकार होते।

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डॉ हंसा शुक्ला की पुस्तक का विमोचन

‘जीतें मन को-जीतें जहां को’ में हैं मन से संबंधित 27 अध्याय  
Dr Hansa Shuklaभिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला की पुस्तक ‘जीतें मन को-जीतें जहां को’ का विमोचन दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एनपी दीक्षित ने किया। इस पुस्तक में मन से संबंधित 27 अध्याय हैं। इस अवसर पर गंगाजली शिक्षण समिति के अध्यक्ष आईपी मिश्रा, उपाध्यक्ष श्रीमती जया मिश्रा, साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा उपस्थित थे।

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कठपुतलियों ने दी आदर्श जीवन की सीख

Kathputli-Kiran-Moitraभिलाई। वैलेन्टाइन डे के अवसर पर प्रबुद्ध नागरिक मञ्च एवं राज्य बाल संरक्षण आयोग के संयुक्त तत्वावधान में मातृ-पितृ दिवस का आयोजन किया गया। मैत्रीबाग में हुए इस कार्यक्रम में कठपुतलियों के माध्यम से आदर्श भारतीय जीवन की सीख दी गई। कठपुतलियों ने बाल मजदूरी, शिक्षा, बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ, माता पिता एवं गुरू का सम्मान, नशाखोरी बंद करने का संदेश दिया। कठपुतलियों का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कठपुतली कलाकार एवं शिक्षा के लिए कठपुतली, कठपुतली एवं नाट्यकला मंच की सचिव किरण मोइत्रा के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।

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राजिम गंगा आरती घाट का भव्य लोकार्पण

रायपुर। महानदी, पैरी और सोढूंर नदी के संगम पर आज माघ पूर्णिमा के अवसर पर 15 दिवसीय राजिम महाकुंभ कल्प का शुभारंभ हुआ। छत्तीसगढ़ सहित देश भर से आए संत-महात्माओं की उपस्थिति में देर रात विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने आयोजन का शुभारंभ किया। महानदी के तट पर बने मुख्य मंच में भगवान राजीव लोचन की आरती की गई। इसके पूर्व श्री गौरीशंकर अग्रवाल और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने महानदी के किनारे नवनिर्मित भव्य गंगा आरती घाट का भी लोकार्पण किया और आरती में भी शामिल हुए।

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प्रेम उच्च कोटि का आध्यात्मिक मूल्य है

bhilai-hansa-shukla-sushil-दुर्ग। शासकीय डॉ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी साहित्य विभाग द्वारा ”हिन्दी साहित्य में प्रेम अभिव्यक्ति के विविध आयामÓÓ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक के मुख्य आतिथ्य एवं सुप्रसिद्ध कवि एवं समीक्षक उद्यन बाजपेयी की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि एवं समीक्षक उद्यन बाजपेयी ने कहा कि भारत का रीतिकालीन साहित्य विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और वह प्रथम पंक्ति साहित्य है। गीत-गोविन्द इस देश की सर्वोकृष्ट रचना है। उन्होनें अभिनव गुप्त द्वारा प्रेम की व्याख्या का प्रसंग सुनाया।

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‘रूहदारी’ ने युवाओं को ललकारा

ruhdari-rishi-waliaभिलाई। युवा गीतकार, संगीतकार एवं गायकों से सजी रूहदारी की टीम प्रति रविवार भिलाई के सेन्ट्रल एवेन्यू पर लगने वाली तफरी में एक खास रंग घोल रहे हैं। टीम के लिरिसिस्ट एवं रैपर रिशी वालिया सैफ जहां युवाओं को ललकार रहे हैं वहीं लीड सिंगर अनुपम भट्टाचार्य अपनी गायकी से लोगों को प्रभावित कर रहे हैं।

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राजस्थानी जेवण का उठाया लुत्फ

rajasthani-danceभिलाई। गणतंत्र दिवस की संध्या पर धमधा रोड स्थित जलाराम महेन्द्र वाटिका ने किसी राजस्थानी गांव का स्वरूप धारण कर लिया। विशाल लॉन में दीवान लगे हुए थे जिसपर लोग गावतकियों के सहारे बैठ या लेटकर ठेठ राजस्थानी लोग गीत एवं नृत्य का आनंद ले रहे थे। वहीं भोजनशाला ठेठ राजस्थानी पारम्परिक व्यंजनों की महक से सराबोर था।

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साहित्य में काम नहीं आता आरक्षण, संरक्षण

आदिवासी साहित्यकार सम्मेलन में बोले परदेशीराम
pardesiram-vermaभिलाई। प्रख्यात साहित्यकार परदेसी राम वर्मा ने कहा कि साहित्य सृजन के क्षेत्र में आकर सभी बराबर हो जाते हैं। यहां कोई आरक्षण नहीं मिलता। संरक्षण भी काम नहीं आता। केवल परिश्रम, आत्मविस्वास, साधना, दृष्टि और अनुभव से इस क्षेत्र मेें लोग स्वयं को स्थापित करते हैं। श्री वर्मा भोपाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यकार सम्मेलन को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे। अगला सम्मेलन भिलाई में होगा।

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उर्वशी Short Novel

urvashiसालों बाद मैं एक बार फिर सम्बलपुर स्टेशन पर था। आधी रात का वक्त था। इक्का दुक्का लोग अपने परिजनों को सी-ऑफ करने के बाद लौट रहे थे। अब इस शहर में मेरा कोई ठिकाना नहीं था। कभी यहां के हर घर के दरवाजे मेरे लिए खुले होते थे। पर एक-एक कर समय ने काफी कुछ बदल दिया था। फरवरी 2014 में हुए एक नौका हादसे ने लायंस क्लब से जुड़े अनगिनत साथियों को हमेशा के लिए छीन लिया था। एक साल बाद एक घनिष्ट मित्र का शव घर से मीलों दूर पेड़ पर टंगा बरामद हुआ मिला। लोग कहते हैं कि उसने खुदकुशी कर ली। दो अन्य मित्रों की असमय मृत्यु हो चुकी थी। कुछ लोग जिन्दगी में आगे बढ़ गए थे। इन्हीं में एक चेहरा था उर्वशी का। न जाने वह किस हाल में होगी। यही सोचता हुआ मैं मेन गेट की ओर बढ़ ही रहा था कि अपना नाम सुनकर चौंक गया।

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