Tag Archives: मोटिवेशनल स्पीकर

अपने बच्चों से संवाद बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती, संजीदा बनें : दीपक रंजन

केम्प-1 की महिला स्व सहायता समूह प्रमुखों को दिए टिप्स भिलाई। बच्चे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। अपने बच्चों से ज्यादा कीमती दुनिया में कुछ भी नहीं। परन्तु बच्चों को अच्छे से अच्छा देने की कोशिश में माता-पिता कुछ इतने व्यस्त हो गए हैं कि बच्चे उनसे दूर होते जा रहे हैं। एक परिवारों में उनके बीच संवादहीनता की स्थिति बन रही है। यह अनेक मुसीबतों की जड़ है। इसलिए बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें, भले ही इसके लिए आपको अपनी तरफ से पहल करनी पड़े।

भिलाई। बच्चे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। अपने बच्चों से ज्यादा कीमती दुनिया में कुछ भी नहीं। परन्तु बच्चों को अच्छे से अच्छा देने की कोशिश में माता-पिता कुछ इतने व्यस्त हो गए हैं कि बच्चे उनसे दूर होते जा रहे हैं। एकल परिवारों में उनके बीच संवादहीनता की स्थिति बन रही है। यह अनेक मुसीबतों की जड़ है। इसलिए बच्चों से संवाद बनाए रखें, भले ही इसके लिए आपको अपनी तरफ से पहल करनी पड़े।

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सही लोगों के बीच रहें, खुद को शाबासी दें तो मिलेगी मंजिल : हरीश साईरमन

भिलाई। मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर हरीश साइरमन ने कहा है कि जीवन में रचनात्मकता के साथ निरंतर आगे बढ़ने का केवल एक ही रास्ता है। सही लोगों के बीच रहें, छोटी-छोटी उपलब्धियों पर स्वयं को शाबासी दें और अपनी क्षमताओं को कम करके न आंकें। हरीश साईरमन यहां श्री शंकराचार्य मेडिकल कालेज में टेक्विप-3 योजना के तहत मोटिवेशनल एम्पावरमेंट एवं स्ट्रेस मैनेजमेंट पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।   हरीश ने कहा कि हम सभी एक जैसी ऊर्जा के साथ जन्म लेते हैं। नेगेटिविटी या पाजीटिविटी जैसे गुण हम बड़े होने के क्रम में प्राप्त करते हैं। जिसे हम प्राप्त करते हैं, जब चाहे उसे छोड़ भी सकते हैं।भिलाई। मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर हरीश साइरमन ने कहा है कि जीवन में रचनात्मकता के साथ निरंतर आगे बढ़ने का केवल एक ही रास्ता है। सही लोगों के बीच रहें, छोटी-छोटी उपलब्धियों पर स्वयं को शाबासी दें और अपनी क्षमताओं को कम करके न आंकें। हरीश साईरमन यहां श्री शंकराचार्य मेडिकल कालेज में टेक्विप-3 योजना के तहत मोटिवेशनल एम्पावरमेंट एवं स्ट्रेस मैनेजमेंट पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।   हरीश ने कहा कि हम सभी एक जैसी ऊर्जा के साथ जन्म लेते हैं। नेगेटिविटी या पाजीटिविटी जैसे गुण हम बड़े होने के क्रम में प्राप्त करते हैं। जिसे हम प्राप्त करते हैं, जब चाहे उसे छोड़ भी सकते हैं।

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