Kid comes out of malnurtion after intervention by government

कुपोषण पर बड़ी जीत: मासूम रियांश की जिंदगी में लौटी मुस्कान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुपोषण उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और अधिकारियों के सतत निगरानी के चलते कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन मिल रहा है। बीजापुर परियोजना के रेड्डी सेक्टर अंतर्गत ग्राम पंचायत पालनार के आंगनबाड़ी केंद्र पालनार स्कूलपारा की  गंभीर कुपोषित मासूम रियांश आज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ गया है।
आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत बालक रियांश, पिता बाबलू ताती एवं माता नमिता ताती, नियमित वजन एवं स्वास्थ्य जांच के दौरान गंभीर कुपोषण की स्थिति में पाया गया। उस समय बच्चे का वजन मात्र 6 किलो 200 ग्राम और लंबाई 62.1 सेंटीमीटर दर्ज की गई, जो उसकी आयु के अनुसार अत्यंत कम थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे विशेष निगरानी सूची में शामिल कर त्वरित उपचार प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
इस कार्य में परियोजना बीजापुर की टीम, पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता , सहायिका, ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच का सराहनीय योगदान रहा। बेहतर उपचार एवं पोषण प्रबंधन के लिए रियांश को न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) में भर्ती कराया गया, जहां उसे संतुलित आहार, आवश्यक दवाइयां, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा माता को पोषण संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। एनआरसी से छुट्टी के समय बच्चे का वजन बढ़कर 7 किलो हो गया।
एनआरसी से लौटने के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा रियांश की नियमित वजन निगरानी, गर्म पका भोजन, पोषण आहार, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवार के साथ निरंतर काउंसलिंग की गई। परिवार ने भी जागरूकता और सहयोग का परिचय देते हुए आंगनबाड़ी सेवाओं का नियमित लाभ लिया।
निरंतर देखभाल और सामूहिक प्रयासों का परिणाम यह रहा कि आज रियांश पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान है। वर्तमान में उसका वजन 10 किलो और लंबाई 81.2 सेंटीमीटर है। उसकी सक्रियता, खिलखिलाहट और स्वस्थ शारीरिक विकास इस बात का प्रमाण है कि वह अब सामान्य श्रेणी में आ चुका है और स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर है।
रियांश की यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि समय पर पहचान, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं, मजबूत आंगनबाड़ी व्यवस्था, पंचायत और परिवार का सहयोग यदि एक साथ जुड़ जाए तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती पर प्रभावी रूप से विजय प्राप्त की जा सकती है।

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