बीएससी नर्सिंग की आधी से ज्यादा सीटें खाली इसलिए 10 परसेन्टाइल पर प्रवेश
रायपुर। सरकार ने बीएससी नर्सिंग कोर्स में दाखिला लेने की तिथि को वर्षांत तक बढ़ाने का फैसला लेते हुए प्रवेश परीक्षा में 10 परसेंटाइल हासिल करने वालों को भी प्रवेश के अनुमति दे दी है। यह छात्रहित में कम औऱ नर्सिंग कालेजों के हित में अधिक है। जो बच्चे प्रवेश परीक्षा तक उत्तीर्ण नहीं कर पाए, वे बीएससी पाट्यक्रम में कितने दिन टिक पाएंगे कहना मुश्किल है। दरअसल, छत्तीसगढ़ में बीएससी नर्सिंग की कुल 7811 सीटें हैं जिनमें से 4427 सीटें खाली रह गई थीं।
छत्तीसगढ़ में मेडिकल कालेज औऱ नर्सिंग कालेज खोलने की एक होड़ सी रही है। एक के बाद एक संस्थान खुलते चले गए। कहीं सुविधाएं नहीं तो कहीं शिक्षक नहीं। नर्सिंग कालेजों की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है। जनजातीय इलाकों से बच्चों को पकड़-पकड़ कर नर्सिंग कालेजों में दाखिला तो दे दिया जाता है पर अधिकांश बच्चे इस चार वर्षीय कोर्स में एक दो साल से ज्यादा टिक नहीं पाते।
राज्य में 13 समेत 130 से अधिक नर्सिंग कालेज हैं। राज्य में योग्य फैकल्टीज का अभाव है। ऊपर से पूरी पढ़ाई अंग्रेजी में होती है। पाठ्यक्रम की बात करें तो इसे एमबीबीएस की समतुल्य माना जा सकता है। विद्यार्थियों को एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पोषण, मनोविज्ञान, फार्माकोलॉजी, मेडिकल-सर्जिकल नर्सिंग, साइकिट्रिक नर्सिंग, और पब्लिक हेल्थ जैसे विषय पढ़ने होते हैं। साथ ही किसी अस्पताल में ड्यूटी भी करनी होती है।
सुविधाओं की बात करें तो राज्य में कुछ ही समय पहले 9 नए नर्सिंग महाविद्यालयों के भवन निर्माण कार्य के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। नए नर्सिंग कॉलेज दंतेवाड़ा, बैकुंठपुर, बीजापुर, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, धमतरी, जांजगीर-चांपा और नवा रायपुर (अटल नगर) में खोले जाने हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एडमिशन ले लेने से ही विद्यार्थियों का करियर बन जाएगा? क्या वे यह पढ़ाई पूरी भी कर पाएंगे या फिर फ्रस्ट्रेशन के साथ जीते रहेंगे। फिलहाल जो विद्यार्थी पास होकर अस्पतालों में नौकरी करने के लिए पहुंच रहे हैं, चिकित्सकों का कहना है कि उनमें से आधे भी काम करने के लायक नहीं हैं। कुछ को तो सिखाना भी बेहद मुश्किल है।
मेडिकल औऱ नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रमों के साथ इस तरह का खिलवाड़ क्या सही है?
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