These fighter birds are famous for a different reason

अद्भुत है ये “लड़किन मुर्गियां”, 100 रुपए का बिकता है अंडा

जगदलपुर। देश में कड़कनाथ के साथ ही एक और मुर्गा बेहद मशहूर है। बस्तर अंचल में इन मुर्कों की लड़ाई कराए जाने का पुराना रिवाज है। पर क्या आप जानते हैं कि ये मुर्गियां एक बेहतरीन फाइटर होने के साथ-साथ इंसान के लिए बड़े काम की हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन मुर्गियों के एक अंडे की कीमत 100 रुपए तक हो सकती है। इन मुर्गियों को “असील” के नाम से भी जाना जाता है।असील मुर्गी की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। यह नस्ल दक्षिणी पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में पाई जाती है। ये मुर्गी सहनशक्ति, झगड़ालूपन और जबरदस्त लड़ने की क्षमता की वजह से जानी जाती है। इनके इसी गुण को देखते हुए अब छत्तीसगढ़ शासन ने गांव-गांव में इसके पालन को बढ़ावा देने का निश्चय किया है। माड़पाल में इसी नस्ल के चूजों का वितरण किया गया। असील मुर्गियां काले, लाल मिश्रित रंग के पंख की होती हैं। असील की सभी नस्लों में रेजा (हल्की लाल), टीकर (भूरी), चित्ता (काले और सफेद सिल्वर), कागर (काली), Nurie 89 (सफेद), यारकिन (काली और लाल) और पीला (सुनहरी लाल) नस्लें प्रसिद्ध हैं.।

माड़पाल के अंतर्गत एकीकृत कृषि क्लस्टर योजना के तहत संचालित ब्रूडिंग सेंटर से सोमवार को तीसरे बैच के चूजों का विक्रय किया गया। विशेष रूप से “असील” नस्ल के चूजे प्रदान किये गये। ये मुर्गियां स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने के साथ-साथ अपनी बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। इस पहल के तहत कुल 18 दीदियों को चूजे प्रदान किए गए, जिससे वे अपने घर से ही मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू कर सकेंगी।
उल्लेखनीय है कि देश-दुनिया में अंडों की डिमांड बढ़ी हैं। सरकार किसानों को मुर्गी पालन की व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है. पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत करने के लिए किसानों को बंपर सब्सिडी भी प्रदान की जाती है.
असील की मुर्गी और मुर्गे का पालन ज्यादातर मीट उत्पादन के लिए किया जाता है।अंडे उत्पादन के मामले में इनकी मुर्गियां कमजोर मानी जाती हैं। ये सालाना सिर्फ 60 से 70 अंडे देती हैं। इनके अंडे की कीमत काफी ज्यादा होती है। सामान्य पोल्ट्री अंडा जहां 6 से 10 रुपये का मिलता है वहीं असील मुर्गी का एक अंडा 100 रुपये में मिलता है।
कैसा होता है इनका आकार?
असील मुर्गी का मुंह लंबा और बेलनाकार होता है जो कि पंखों, घनी आंखों, लंबी गर्दन वाला होता है. इनकी मजबूत और सीधी टांगे होती हैं. इस नसल के मुर्गे का भार 4-5 किलो और मुर्गी का भार 3-4 किलो होता है. इसके कोकराल (युवा मुर्गे) का औसतन भार 3.5-4.5 किलो और पुलैट्स (युवा मुर्गी) का औसतन भार 2.5-3.5 किलो पाया जाता है. बता दें कि देश में कई जगह मुर्गी या मुर्गों की लड़ाई चलन में हैं. ऐसे में असील नस्ल की मुर्गी और मुर्गों को लड़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
ठंड में दवाओं के तौर पर इनके अंडे का किया जाता है सेवन
असील मुर्गी के अंडे सर्दी से बचाने के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. ठंड के समय इनका सेवन दवा के तरीके से किया जाता है. साथ ही इसके अंडे का सेवन आंखों के लिए भी फायदेमंद होता है।

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