इन नीम हकीमों पर क्यों नहीं पड़ती स्वास्थ्य विभाग की नजर

इन नीम हकीमों पर क्यों नहीं पड़ती स्वास्थ्य विभाग की नजर

भिलाई। नर्सिंग होम्स से लेकर छोटे बड़े अस्पतालों की नाक में दम करने वाले स्वास्थ्य विभाग की नजर आखिर इन नीम हकीमों पर कब पड़ेगी? गली-गली में खुल गए ब्यूटी पार्लर न केवल अवैध रूप से स्किन और हेयर ट्रीटमेंट कर रहे हैं बल्कि ग्राहकों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। अल्प प्रशिक्षित ब्यूटीशियन न केवल केमिकल पील कर रहे हैं, बोटॉक्स इंजेक्शन लगा रहे हैं बल्कि स्किन एवं हेयर ट्रीटमेंट के नाम पर कुछ भी कर रहे हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्यूटी पार्लर में केमिकल पील्स, लेजर, या इंजेक्शन (बोटॉक्स) जैसे मेडिकल उपचार कराना जोखिम भरा हो सकता है। इन प्रक्रियाओं के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) की आवश्यकता होती है। पार्लर में ऐसे उपचार से गंभीर साइड इफेक्ट्स, संक्रमण, या स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। बिना डिग्री के ऐसी प्रक्रियाएं करना दंडनीय अपराध है।

कई बार ब्यूटी पार्लरों में अपनी सेहत बिगाड़ने के बाद लोग त्वचा रोग के डाक्टर के पास पहुंचते हैं और तब इलाज काफी महंगा हो जाता है। ब्यूटीशियन मेडिकल प्रक्रियाओं (जैसे कि लेजर या गहरे केमिकल पील्स) के लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं, जो केवल डर्मेटोलॉजिस्ट या कॉस्मेटिक सर्जन द्वारा की जानी चाहिए।
बोटॉक्स, फिलर्स, या खराब केमिकल पील से चेहरे पर जलन, एलर्जी, या स्थायी निशान पड़ सकते हैं।
बाल धोते समय गर्दन को पीछे की ओर मोड़ने से वर्टेब्रल आर्टरी में समस्या आ सकती है, जिससे “ब्यूटी पार्लर स्ट्रोक” का खतरा होता है।
फेशियल, डीप कंडीशनिंग, या हेयर ट्रीटमेंट जैसे सामान्य सौंदर्य उपचारों के लिए पार्लर सुरक्षित हैं, लेकिन त्वचा संबंधी किसी भी बीमारी के लिए डॉक्टर को ही दिखाएं।

(Diplay pic credit laserskin.co.in)

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