किताबों पर उड़ा दी पूरी कमाई, बनाई सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी
बेंगलुरु। एक तरफ जहां अब लोग किताबों से कतराने लगे हैं, सारा सारा दिन मोबाइल और कम्प्यूटर में अपना सिर दिए रहते हैं वहीं एक शख्स ऐसा भी है जिसने जिन्दगी में अपनी मेहनत से जो कुछ कमाया उसे किताबें खरीदने पर खर्च कर दिया। जीवन धारण के लिए जितना चाहिए बस उतना ही स्वयं पर खर्च किया। यहां तक कि फर्श पर ही सोते रहे। इस तरह उन्होंने बना ली दुनिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी। अब उन्हें पद्मश्री मिलने जा रहा है।कर्नाटक के मांड्या जिले में हरलहल्ली गांव के 77 वर्षीय एन्के गौड़ा ही वह शख्स हैं जिन्होंने अपने वेतन का सबसे बड़ा हिस्सा किताबों पर खर्च कर दिया। उन्होंने इसका नाम पुस्तक माने रखा है। उनकी इस लाइब्रेरी में 20 लाख से ज्यादा किताबे हैं। उनका सारा दिन इन किताबों के बीच गुजरता है। गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले उन्हें पद्मश्री से नवाजने की घोषणा की गई।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में वह बस कंडक्टर रहे। चीनी कारखाने में करीब 30 साल काम किया। किताबों के प्रति जुनून के चलते ही वेतन का 80% हिस्सा इन पर खर्च करते रहे। किताबें खरीदने के लिए मैसूर में संपत्ति भी बेच दी। पैसों की किल्लत के चलते देखरेख के लिए कोई कर्मचारी नहीं रख सके। पत्नी और बेटे के साथ पुस्तकालय में ही रहते हैं। फर्श पर सोते हैं। एक छोटे कोने में खाना बनता है।
सड़क किनारे मौजूद उनकी इस लाइब्रेरी को बाहर से देखने से ज्यादा कुछ पता नहीं चलता। लेकिन अंदर जाते ही किताबों का भंडार देखने को मिलता है। गौड़ा की लाइब्रेरी में दुनियाभर में छपी शायद ही ऐसी कोई प्रमुख किताब है, जो यहां नहीं है। गौड़ा बताते हैं कि यहां तमाम भाषाओं के पांच हजार शब्दकोश हैं। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स समेत कई संगठनों ने इसे मान्यता दी है।
गौड़ ने बताया कि उनकी लाइब्रेरी में पुराण, उपनिषदों और कुरान, दो से तीन सौ साल पुरानी इतिहास की किताबों के अलावा रामायण और महाभारत के तीन-तीन हजार संस्करण हैं।
महात्मा गांधी पर ढाई हजार से ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा नोबेल पुरस्कार, साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं की भी किताबें मिल जाएंगी।
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