गुस्ताखी माफ : प्रधानमंत्री आवास नहीं, इनपर चलाया बुलडोजर
छत्तीसगढ़ में धुर नक्सल क्षेत्र के नाम से मशहूर बीजापुर बस स्टैंड के पीछे चट्टानपारा में 55 मकान ध्वस्त कर दिये गए। शांतिनगर में भी 20 कब्जों को मिलाकर कुल 75 मकान तोड़े जाने हैं। पिछले दो सालों से इन्हें बस्ती खाली करने के लिए पालिका नोटिस दे रहा था। जब नोटिसों का कोई असर नहीं हुआ तो पालिका ने यहां के मकानों पर बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया। कौन थे ये लोग, और यहां क्यों रह रहे थे? ये उन गांवों के आदिवासी हैं जहां उनका जीवन अब भी खतरे में हैं। इनमें से कुछ झोंपड़े डीआरजी जवानों के हैं तो कुछ नक्सल पीड़ित परिवारों के। अब इनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है। इस ठंड में ये परिवार अब खुली सड़क पर हैं। प्रशासन का काम सिर्फ विकास कार्यों को आगे बढ़ाना ही नहीं होता। यह भी प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंदों को चिन्हित करे औऱ उन तक राहत पहुंचाए। बेघर लोगों को पक्का आवास देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार प्रयास कर रहे हैं। योजनाओं के तहत उन्हें मकान दिलाया जा रहा है जिनके पास देश भर में कहीं भी अपना घर नहीं है। दस्तावेजों के आधार पर ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाता है और फिर लॉटरी के जरिये उन्हें आवास आवंटित कर दिये जाते हैं। तो क्या इन 75 घरों को फिर से नहीं बसाया जा सकता था? जाहिर है इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं होगा। पालिका की नजर में वे अवैध कब्जा धारी थे। उनकी मजबूरी से पालिका को कोई लेना देना नहीं है। पालिका के पास बेदखली के अपने कायदे कानून हैं। पालिका ने पहले नोटिस दिया, फिर बेदखली कर दी। यहां सवाल है संवेदनशीलता का। नियम-कानून-कायदे में बंधे लोगों के पास इसी एक भाव का घोर अभाव होता है। कलेक्टर कहते हैं कि सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सही कह रहे हैं। अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। पर आपकी जनता कहां और किस हाल में रह रही है, इसकी चिंता करना भी शायद आपकी ही जिम्मेदारी है।
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