छत्तीसगढ़ी हाना लोकज्ञान, भाषा और चित्रकला का अनूठा संगम
भिलाई। छत्तीसगढ़ी हाना का हिंदी भावार्थ एवं संबंधित चित्र/तस्वीर निर्माण पर आधारित अंतर-महाविद्यालयीन प्रतियोगिता का आयोजन इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के सहयोग से किया गया। इंटैक दुर्ग भिलाई अध्याय की संयोजिका डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कि इंटेक का उद्देश्य विद्यार्थियों को सांस्कृतिक धरोहर से परिचित करना है तथा हाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर एवं भाषा के समृद्धि का प्रतीक है। इस परिप्रेक्ष्य में विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ी भाषा की समृद्ध लोकपरंपरा, लोकज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा उन्हें अपनी मातृभाषा के प्रति संवेदनशील बनाना था। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को हाना का हिंदी भावार्थ प्रस्तुत करने के साथ-साथ उससे संबंधित चित्र या दृश्यात्मक अभिव्यक्ति करने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे भाषा के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा भी विकसित हो सके।
डॉ सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिंदी कार्यक्रम प्रभारी ने बताया नई शिक्षा नीति में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा में रखने पर विशेष बल दिया गया है। मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम अधिक सहज, प्रभावी और संस्कारपूर्ण बनता है। छत्तीसगढ़ी हाना जैसी लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ अत्यंत आवश्यक हैं, इनके माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है।
निर्णायक के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार सरला शर्मा पद्मनाभपुर एवं स.प्रा, शिक्षा विभाग उषा साहू उपस्थित रहीं।
विजयी प्रतिभागियों को इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय के सौजन्य से पुरस्कृत किया गया। प्रथम स्थान स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की अदिति पांडे, द्वितीय स्थान पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की एकता दीवान तथा तृतीय स्थान स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की नंदिनी कर एवं रिया बोरकर को दिया गया। सांत्वना पुरस्कार संदीपनी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मेसी की रेणुका साहू को प्रदान किया गया।
डॉ. सुनीता वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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