International Lecture in Science College Durg

दुर्ग साइंस कालेज में भूविज्ञान पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान

सफलता का मूलमंत्र हमारे अंर्तमन में – ग्रेग शैलनट

दुर्ग। सफलता का मूलमंत्र हमारे अंर्तमन में निहित है। हम सभी को मन से किसी भी कार्य को करने का प्रयास करना चाहिए तो सफलता अवष्य प्राप्त होती है। ये उद्गार ताइवान नाॅर्मल युनिवर्सिटी के भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक प्रोफेसर ग्रेग शैलनट ने व्यक्त किये। प्रोफेसर शैलनट आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में भू-विज्ञान विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ ऑनलाईन चर्चा कर रहे थे।

यह जानकारी देते हुए साईंस कालेज, दुर्ग के भूगर्भषास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. एस.डी. देशमुख ने बताया कि प्रोफेसर शैलनट के साथ रूबरू होकर भूगर्भशास्त्र के विद्यार्थी अत्यंत रोमांचित हुये। वे पहिली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय प्रोफेसर एवं वैज्ञानिक से सीधी बातचीत कर रहे थे। इस दौरान कालेज के प्रोफेसर डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, पंडित रविषंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के भू-विज्ञान अध्ययन शाला के विभागाध्यक्ष डाॅ. के. आर. हरि तथा सहायक प्राध्यापक डाॅ. विकास स्वर्णकार भी उपस्थित थे। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऑनलाईन विचार-विमर्ष में भूगर्भशास्त्र के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
डाॅ. एस.डी. देशमुख एवं डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि प्रोफेसर शैलनट भूवैज्ञानिक फील्ड वर्क हेतु छत्तीसगढ़ के सोनाखान तथा कोरबा एवं कटघोरा आदि क्षेत्रों में आए हुये है तथा पिछले एक सप्ताह से विभिन्न चट्टानों, खनिजों का भूवैज्ञानिक अध्ययन कर रहे है। प्रोफेसर शैलनट अमेरिका, चीन, कनाडा, मैक्सिको, आर्केटिक आदि क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक अध्ययन कर चुके है।

आज विद्यार्थियों से चर्चा के दौरान प्रोफेसर शैलनट ने कहा कि भारत के जिन क्षेत्रों में वे भूवैज्ञानिक फील्ड वर्क कर रहे है, उनकी आयु लगभग 3.5 बिलियन वर्ष है। प्रोफेसर शैलनट ने भूगर्भशास्त्र के विद्यार्थियों से कहा कि विषय को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा फील्ड वर्क ईमानदारी पूर्वक करें। उन्होंने विद्यार्थियों को विदेश में अध्ययन करने के अवसरों की विस्तार से जानकारी दी। प्रोफेसर शैलनट के अनुसार पूरे विश्व के विद्यार्थियों का नजरिया एवं स्तर लगभग एक समान है। उन्होंने विद्यार्थियों से नये खनिज निक्षेप खोजें जाने हेतु प्रयत्न करने पर बल दिया।

प्रोफेसर शैलनट से प्रश्न पूछने वालों में भूगर्भशास्त्र विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी रूचि देशमुख, फाल्गुनी साहू , एवेंद्र कुमार, अर्जुन, दीपा साहू , मानसी जंघेल, झलक मिश्रा तथा कुुसुम पटेल शामिल थे। अंत में डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर भूगर्भषास्त्र विभाग के अतिथि प्राध्यापक डाॅ. इन्द्रजीत साकेत एवं डाॅ. राहुल द्विवेदी भी उपस्थित थे।

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