Paltanghat, Satbahiniya Falls and Tatapani present a wonderful site seing and picnic spot

प्रकृति की गोद में बसा है रामानुजगंज, आसपास कई दर्शनीय स्थल

रामानुजगंज (बलरामपुर)। कन्हर नदी के किनारे पलटन घाट एवं वन वाटिका अपनी नैसर्गिक खूबसूरती के कारण क्षेत्र के प्रमुख आकर्षण केंद्र माने जाते हैं। हरियाली, शांत वातावरण एवं प्राकृतिक छटा सैलानियों को स्वत: ही अपनी ओर आकर्षित करती है। छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य झारखण्ड से भी लोग अपने परिवार केसाथ यहां सुकून के कुछ पल बिताने तथा खूबसूरत प्रकृति का नजारा करने आते हैं।

नववर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड के रंका, डाल्टनगंज, गढ़वा सहित अन्य शहरों से भी बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचते हैं। जनवरी से मार्च के प्रथम पखवाड़े तक यह क्षेत्र पर्यटकों के अनुकूल रहता है।

पलटन घाट रामानुजगंज के पास कन्हर नदी के तट पर स्थित है, जो अपनी रंगीन चट्टानों (सफेद और काली) और कल-कल करती नदी के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल पिकनिक मनाने, नदी किनारे बैठकर प्रकृति का आनंद लेने और फोटो खींचने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहाँ हर साल नए साल पर भारी भीड़ होती है, जहाँ लोग चूल्हा जलाकर पिकनिक मनाते हैं।
वनवाटिका रामानुजगंज का एक सुंदर पार्क है, जो अपनी हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यह भी पिकनिक मनाने के लिए एक लोकप्रिय स्थान है।यहाँ लोग परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति का लुत्फ उठाते हैं और बच्चे भी यहाँ घूमते हैं। इसे ‘चीतल और नीलगाय पार्क’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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तातापानी प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों और शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध एक धार्मिक और पर्यटन स्थल है। इसी तरह पवई फॉल एक सुंदर झरना है जो कि पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए अच्छा है।
पास ही सेमरसोत वन्यजीव अभ्यारण्य है जहां  वन्यजीवों और पक्षियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखा जा सकता है।

Archaeological Heritage: डीपाडीह में बिखरे पड़े हैं इतिहास के अवशेष,  संरक्षण नहीं मिलने से हो रही दुर्दशा
डीपाडीह एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का स्थान है। जो 8वीं से 14वीं शताब्दी के शैव और शाक्त संप्रदायों से संबंधित प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें खजुराहो शैली की कामुक मूर्तियाँ, शिव मंदिर, महिषासुर मर्दिनी और अन्य देवी-देवताओं की कलात्मक नक्काशी देखने को मिलती है, जो इसे ऐतिहासिक और कलात्मक रूप से एक अनूठा स्थान बनाती है।
विश्रामपुर के पास ही झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व का ऐसा संगम है, जो हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. झरने की दूधिया धाराओं के बीच बसा यह स्थान न केवल पर्यटकों को सुकून देता है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है।

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