बढ़ रहे यूरेटर स्ट्रिक्चर के मामले, लापरवाही से जा सकती है किडनी
भिलाई। पुरुषों में यूरेटर स्ट्रिक्चर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो यह किडनी स्टोन, मूत्र नली संक्रमण से लेकर किडनी फेल्योर तक कारण बन सकते हैं। हाइटेक में पिछले तीन माह में यूरिनरी समस्याओं से जुड़ी 141 से अधिक छोटी बड़ी सर्जरी की गई है। उक्त जानकारी यूरोलॉजिस्ट डॉ नवीन वैष्णन ने दी।
डॉ वैष्णव ने बताया कि पिछले चार महीने में हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में यूरनरी प्राब्लम्स से जुड़ी 93 बड़ी सर्जरियां की गईं। इनमें नेफ्रोयूरेटेरोक्टामी विथ ब्लैडर कफ एक्सीजन, बक्कल म्यूकोसा ग्राफ्ट यूरेथ्रोप्लास्टी, टीयूआरपी, पथरी, किडनी की पथरी तथा ब्लैडर से थक्कों का हटाया जाना शामिल था।
डॉ वैष्णव ने बताया कि ऐसे अधिकांश मामलों के शुरुआती लक्षणों में ज्यादा अंतर नहीं होता। पेशाब का रुक रुक कर आना, पतली धार में आना, ब्लैडर का हमेशा भरा-भारी लगना, पेट के निचले हिस्से में वजन जैसा महसूस होना, आदि शामिल होते हैं। पेशाब रुकने के कारण संक्रमण, मूत्र का किडनी की ओर लौटना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे मामलों में तत्काल जांच करवानी चाहिए। अधिकांश मामले दवाइयों तथा भोजन में सुधार से ठीक किये जा सकते हैं।
इसके अलावा मूत्रमार्ग की स्टेंटिंग, स्टेंट निकालना, खतना, वीआईयूसी तथा एसपीसी-पीसीएन जैसी माइनर प्रक्रियाएं भी अस्पताल में की गईं। इनमें आम तौर पर मरीज को एक या दो दिन में ही छुट्टी दे दी जाती है।
डॉ वैष्णव ने बताया कि मूत्र से जुड़ी किसी भी समस्या का तत्काल उपचार जरूरी होता है। इससे मामला किडनी तक नहीं पहुंचता। इसलिए पेशाब में लगातार जलन होने, पेशाब की मात्रा कम होने या उसका रंग जरूरत से ज्यादा गाढ़ा होने, पेशाब के समय दर्द होने या पेशाब कम होने के साथ पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होने पर तत्काल किसी यूरोलॉजिस्ट से सम्पर्क करना चाहिए।
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