Traders and industrialists oppose export tax by Nagar Nigam

भिलाई नगर निगम के एक्सपोर्ट टैक्स के खिलाफ है उद्योगजगत

भिलाई। भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति ने भिलाई नगर निगम द्वारा थोपे गए एक्सपोर्ट टैक्स का विरोध किया है। “एक्सपोर्ट टैक्स” के विरोध में भिलाई के सभी प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठन—स्टील चैंबर भिलाई, छत्तीसगढ़ वायर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, भिलाई वायर ड्राइंग संगठन, एनसिलरी संगठन, लघु उद्योग भारती, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ एवं समस्त लघु उद्योग भिलाई एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं।उद्योगपतियों एवं व्यापारियों का कहना है कि  नगर निगम ने 2017 से बैक डेट में कर वसूली के नोटिस जारी किए हैं, जिनमें 7–8 वर्ष का बकाया और भारी पेनल्टी जोड़ दी गई है—यह न तो पारदर्शी है, न न्यायोचित। व्यापारियों व लघु उद्योगों को बिना पूर्व सूचना या सुनवाई के अवसर के नोटिस भेजे जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में इस तरह का कर किसी अन्य नगर निगम में लागू नहीं है।
समिति ने कहा कि एक्सपोर्ट टैक्स एक अप्रत्यक्ष कर है जो किअंत में ग्राहक के द्वारा वहन किया जाना है। नगर निगम ने उद्योगों को इस बात के लिए विश्वास में नहीं लिया। उद्योग बिल में जोड़कर ग्राहकों से वसूल कर नगर निगम को दे देते ।
समिति ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि  देश में “वन नेशन, वन टैक्स” की व्यवस्था लागू होने के बाद एंट्री टैक्स व ऑक्ट्राय जैसे स्थानीय कर समाप्त किए गए थे। ऐसे में निर्यात पर नगर निगम कर लगाना केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीति और जीएसटी व्यवस्था की मूल भावना का उल्लंघन है। निगम के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसी कोई व्यवस्था न होने के कारण यह कर सीधा उद्योगों की लागत बढ़ाता है।

भिलाई की लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयां पहले से ही मंदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (विशेषकर चीन से) की मार झेल रही हैं। 7–8 वर्ष का एकमुश्त टैक्स और पेनल्टी जोड़कर वसूली करने से अनेक इकाइयों के बंद होने का खतरा है। इससे 40,000 से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका पर संकट आ सकता है तथा राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को जीएसटी राजस्व का नुकसान होगा।
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